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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२३९

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गोमेध का गंगोत्तरी का वह स्थान जहाँ से गंगा निकलती हैं। गोमेध-संज्ञा पुं० एक यज्ञ जिसमें गौ से हवन किया जाता था । गोय-संज्ञा पुं० गेंद | गोया - क्रि० वि० माना । गोर-संज्ञा स्त्री० कुत्र । + वि० गोरा । गोरखधंधा - संज्ञा पुं० कोई ऐसी चीज़ पुं० एक प्रसिद्ध या काम जिसमें बहुत झगड़ा या उलझन हो । गोरखनाथ - संज्ञा अवधूत या हठयोगी । गोरखपंथी - वि० गोरखनाथ के चलाए हुए संप्रदायवाला | गोरखा-संज्ञा पुं० इस देश का निवासी । गोरज - संज्ञा पुं० गौ के खुरों से उड़ी हुई धूल | गोरस - संज्ञा पुं० १. दूध । २. दधि । ३. मठा । गोरा - वि० सफेद और स्वच्छ वर्ण वाला । १. गोरापन संज्ञा पुं० फिरंगी । गोराई -संज्ञा स्त्री० २. सुंदरता । गोरिल्ला - संज्ञा पुं० बहुत बड़े आकार का एक प्रकार का बनमानुस । गोरी - संज्ञा स्त्री० सुंदर और गौर वर्ण की स्त्री । रूपवती स्त्री । गोरू - संज्ञा पुं० चौपाया । गोरोचन - संज्ञा पुं० पीले रंग का एक प्रकार का सुगंधित द्रव्य जो गौ के पित्त में से निकलता है । गोलंदाज़ -संज्ञा पुं० तोप में गोला रखकर चलानेवाला । गोलंबर - संग पुं० १. गुंबद । २. २३१ गोलाई । गोशमाली गोल - वि० जिसका घेरा या परिधि वृत्ताकार हो । संज्ञा पुं० वृत्त । संज्ञा पुं० मंडली | गोलक - संज्ञा पुं० १. गोलोक । २. गोल पिंड । ३. विधवा का जारज पुत्र | ४. मिट्टी का बड़ा कुंडा । ५. फंड । गोलगप्पा -संज्ञा पुं० एक प्रकार की महीन और करारी घी में तली फुलकी । गोलमाल - संज्ञा पुं० गड़बड़ । गोल मिर्च- संज्ञा स्त्री० काली मिर्च । गोला - संज्ञा पुं० १. किसी पदार्थ का बड़ा गोल पि ंड | २. लोहे का वह गोल पिंड जिसे तोपों की सहायता से शत्रों पर फेंकते हैं । ३. वह मंडी जहाँ अनाज या किराने की बड़ी दूकानें हों । गोलाई - संज्ञा स्त्री० गोलापन | गोलाकार, गोलाकृति - वि० जिसका आकार गोल हो । गोलार्द्ध - संज्ञा पुं० पृथ्वी का श्राधा भाग जो एक ध्रुव से दूसरे ध ुव तक उसे बीचोबीच काटने से बनता है । गोली -संज्ञा स्त्री० छोटा गोलाकार पिंड | गोलोक -संज्ञा पुं० कृष्ण का निवास- स्थान जो सब लोकों से ऊपर माना जाता है। गोवर्द्धन -संज्ञा पुं० वृंदावन का एक पवित्र पर्वत । गोविंद - संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । गोश -संज्ञा पुं० कान । गोशमाली-संज्ञा स्त्री० १. कान मे A