घूँटना छूटना - क्रि० स० द्रव पदार्थ को गले के नीचे उतारना । घूँटी - संज्ञा स्त्री० एक औषध जो छोटे बच्चों को नित्य पिलाई जाती है । घूँसा-संज्ञा पुं० मुक्का । घूम- संज्ञा स्त्री० घूमने का भाव । घूमना-क्रि० प्र० १. चारों ओर फिरना । २. सफ़र करना । ३. मँडराना । ४. मुड़ना । घूरना - क्रि० प्र० बार बार आँख गड़ा कर बुरे भाव से देखना । घूरा -संज्ञा पुं० कूड़े-करकट का ढेर । घूस-संज्ञा स्त्री० चूहे के वर्ग का एक बड़ा जंतु । संज्ञा स्त्री० रिशवत । घृणा - संज्ञा स्त्री० नफरत । घृणित - वि० घृणा करने योग्य । घृत- संज्ञा पुं० घी । घेघा - संज्ञा पुं० १. गले की नली जिससे भोजन या पानी पेट में जाता है । गले का एक रोग जिसमें गले में सूजन होकर बतौड़ा सा विकल ता है । २. घेर - संज्ञा पुं० घेरा । घेरघार-संज्ञा स्त्री॰ चारों ओर से घेरने या छा जाने की क्रिया । घेरना - क्रि० स० १. चारों ओर से छेंकना । २. खुशामद करना । घेरा - संज्ञा पुं० १. चारों ओर की सीमा । २. परिधि का मान । ३. हाता । ४. सेना का किसी दुर्ग या गढ़ को चारों ओर से छेंकने का काम । घेवर-संज्ञा पुं० एक प्रकार की मिठाई । घोंघा - संज्ञा पुं० [स्त्री० घोंघी ] शंख की तरह का एक कीड़ा । २४० घोरना वि० मूर्ख | घटना- क्रि० स० घूँट घूँट करके पीना । हज़म करना । क्रि० स० दे० "घटना" । घोपना- क्रि० ६० स० धँसाना । चुभाना । घोंसला -संज्ञा पुं० घास फूस आदि से बना हुआ वह स्थान जिसमें पक्षी रहते हैं । घोंसुश्रा+*-संज्ञा पुं० दे० " वेसिला"। घोखना- क्रि० स० रटना । घोट, घोटक - संज्ञा पुं० घोड़ा । घोटना- क्रि० स० १. चिकना या चमकीला करने के लिये बार बार रगड़ना । २. बारीक पीसने के लिये बार बार रगड़ना । ३. मश्क करना । गला ) इस प्रकार दबाना कि साँस रुक जाय । संज्ञा पुं० घोटने का औज़ार । घोटवाना- क्रि० स० घोटने का काम दूसरे से कराना । ४. घोटा -संज्ञा पुं० वह वस्तु जिससे घोटा जाय । घोटाई - संज्ञा स्त्री० घोटने का काम या मज़दूरी घोटाला - संज्ञा पुं० गड़बड़ । घोड़साल | -संज्ञा स्त्री० दे० "घुड़- साल" । घोड़ा-संज्ञा पुं० [स्त्री० घोड़ी] १. अश्व । २. वह पेंच या खटका जिसके दबाने से बंदूक में गोली चलती है । ३. शतरंज का एक मोहरा । घोड़िया -संज्ञा स्त्री० छोटी घोड़ी । घोड़ी-संज्ञा स्त्री० घोड़े की मादा । घोर - वि० १. भयानक । २. घना । संज्ञा स्त्री० गर्जन । घोरना- क्रि० प्र० गरजना ।
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