चिरवाना कार्य या मज़दूरी । चिरवाना- क्रि० स० चीरने का काम कराना । चिरहटा | -संज्ञा पुं० दे० "चिड़ीमार " । चिराई -संज्ञा स्त्री० चीरने का भाव, क्रिया या मज़दूरी | चिराग -संज्ञा पुं० दीपक । चिराना- क्रि० स० फड़वाना । वि० पुराना | चिरायता - संज्ञा पुं० एक पौधा जो बहुत कड़वा होता है और दवा के काम में आता है। चिरायु - वि० बड़ी उम्रवाला । चिरिया | ७- संज्ञा स्त्री० दे० "चि- दिया" । चिरिहार- संज्ञा पुं० दे० "चिड़ीमार " । चिरौंजी - संज्ञा स्त्री० पियाल वृक्ष के फलों के बीज की गिरी । चिलक-संज्ञा स्त्री० १. श्रभा । २. टीस | चिलकना - क्रि० भ० १ चमचमाना । २. रह रहकर दर्द उठना । चिलकानाt - क्रि० स० चमकाना । चिलगोजा - संज्ञा पुं० एक प्रकार का २५६ मेवा । चिलबिला, चिलबिल्ला - वि० [स्त्री० चिलबिल्ली ] चंचल | चिलम -संज्ञा खो० कटोरी के श्राकार का नलीदार मिट्टी का एक बरतन जिस पर तंबाकू जलाकर धुआं पीते हैं। चिलमची-संज्ञा बी० देग के आकार का एक बरतन जिसमें हाथ धोते और कुल्ली आदि करते हैं । चिलड़-संज्ञा पुं० जूँ की तरह का एक बहुत छोटा सफेद कीड़ा । चीतना चिल्ल-पो- संज्ञा की० शोर-गुल । चिल्ला- संज्ञा पुं० चालीस दिन का समय । संज्ञा पुं० १. एक जंगली पेड़ । २. उड़द या मूँग आदि की घी चुपड़- कर सेकी हुई रोटो | चिल्लाना - क्रि० भ० ज़ोर से बोलना । चिल्लाहट - संज्ञा खी० १ चिल्लाने का भाव । २. हल्ला । चिहुँकना - क्रि० प्र० कना" । चिहुँटना- क्रि० स० दे० १. चुटकी हुआ काटना । २. चिपटना । चिहुँटी- संज्ञा स्त्री० चुटकी । चिह्न - संज्ञा पुं० निशान । चिह्नित - वि० चिह्न किया चीं चींचीं -संज्ञा स्त्री० पक्षियों अथवा छोटे बच्चों का बहुत महीन शब्द । चीं चपड़ -संज्ञा स्त्री० विरोध में कुछ बोलना | चींटा - संज्ञा पुं० दे० "चिउँटा" । चीक - संज्ञा बी० बहुत ज़ोर से चिल्लाने का शब्द । चीकट -संज्ञा पुं० तलछट | वि० बहुत मैला | चीख - संज्ञा स्त्री० दे० "चीक" । चीखना- क्रि० स० स्वाद जानने के लिये, थोड़ी मात्रा में खाना । चीज़- संज्ञा स्त्री० १. वस्तु । २. महत्व की वस्तु । चीठी ! - संज्ञा स्त्री० दे० "चिट्ठी" । चीढ़-संज्ञा पुं० एक बहुत ऊँचा पेड़ । चीतना- क्रि० स० [वि० चोता ] १. सोचना | २. स्मरण करना । क्रि० स० चित्रित करना ।
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