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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२७२

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-संज्ञा पुं० चिड़िया का बच्चा । चें पें- संज्ञा श्री० चिल्लाहट । चेकितान - संज्ञा पुं० महादेव । चेचक संज्ञा बी० शीतला रोग । चेट-संज्ञा पुं० [स्त्री० चैटी या चेटिका ] १. दास । २. भड़ । चेटक -संज्ञा पुं० [स्रो० चैटकी] सेवक । चेटकनी -संज्ञा स्त्री० दे० "चेटक" । चेटकी -संज्ञा पुं० जादूगर । चेटी-संज्ञा स्त्री० दासी । चेत्-भव्य० यदि । चेत - संज्ञा पुं० १. होश । २. सुध । चेतन - वि० जिसमें चेतना हो । चेतनता - संज्ञा स्त्री० चैतन्य | चेतना -संज्ञा स्त्री० १. बुद्धि । होश | २. क्रि० प्र० होश में आना । क्रि० स० विचारना । चेतावनी -संज्ञा स्त्री० सतर्क होने की सूचना । चेर, चेरा - संज्ञा पुं० [स्त्री० चेरी ] नौकर । २. चेला | 9. . २६४ चेराई -संज्ञा स्त्री० दासत्व | चेरी | संज्ञा स्त्री० " चेरा" का स्त्री० । चेल - संज्ञा पुं० कपड़ा | चेला-संज्ञा पुं० [ खी० चैलिन, चैली] १. शिष्य । २. विद्यार्थी । चेलिन, चेलो- संज्ञा स्त्री० "चेला" का स्त्री० रूप । २. घेष्टा - संज्ञा स्त्री० कोशिश । चेहरा - संज्ञा पुं० १. मुखड़ा । किसी चीज़ का अगला भाग । चैत - संज्ञा पुं० फागुन के बाद और बैसाख से पहले का महीना । चोगा चैतन्य - संज्ञा पुं० १. चेतन आत्मा । २. ज्ञान । चैती - संज्ञा स्त्री० [हिं० चैत + ई (प्रत्य॰)] १. रब्बी । २. एक चलता गाना जो चैत में गाया जाता है । वि० चैत का । चैत्य - संज्ञा पुं० १. मकान । चैत्र - संज्ञा पुं० चैत । २. मंदिर | चैत्ररथ - संज्ञा पुं० कुबेर के बाग़ का नाम । चैन-संज्ञा पुं० आराम । चैल-संज्ञा पुं० कपड़ा । चैला -संज्ञा पुं० [स्त्री० भल्पा० चैली ] कुल्हाड़ी से चीरी हुई लकड़ी का टुकड़ा जो जलाने के काम में श्राता है । चोंगा - संज्ञा पुं० कागज़, टीन आदि बी हुई नी । चोंच -संज्ञा स्त्री० टोंट | चांडा-संज्ञा पुं० सिचाई के लिये खोदा हुधा छोटा कुआँ । चथ-संज्ञा पुं० उतने गोबर का ढेर जितना एक बार गिरे । चथना - क्रि० स० किसी चीज़ में से उसका कुछ अंश बुरी तरह नाचना । चांधर - वि० १. जिसकी आँखें बहुत २. मूर्ख | चोकर - संज्ञा पुं० गेहूँ, जो आदि का छिलका जो घाटा छानने के बाद बच जाता है। चोख + - संज्ञा स्त्री० तेज़ी । चोखा - वि० १. खरा । २. धारदार | संज्ञा पुं० भरता । चोगा-संज्ञा पुं० पैरों तक लटकता हुआ एक ढीला पहनावा ।