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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२७५

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चौपथ चापथ - संज्ञा पुं० चौराहा । चौपद-संज्ञा पुं० "चौपाया" । चैा पहल - वि० जिसके चार पहल या पार्श्व हो । चौपाई- एक छंद । चौपाया -संज्ञा पुं० पशु । -संज्ञा स्त्री० १६ मात्राओं का चार पैरोंवाला चौपाल - संज्ञा पुं० बैठक । चौबे- संज्ञा पुं० [स्त्री० चौबाइन ] ब्राह्मणों की एक जाति या शाखा । चौमंजिला - वि० चार मराति खंडोंवाला । २६७ चंद चौरासी - वि० अस्सी से चार अधिक । चौराहा - संज्ञा पुं० चौमुहानी । चौरी - संज्ञा स्त्री० छोटा चबूतरा । चारेठा -संज्ञा पुं० पानी के साथ पीसा हुआ चावल । चौर्य - संज्ञा पुं० चोरी | चौलाई - संज्ञा स्त्री० एक पौधा जिसका साग खाया जाता है । चावा-संज्ञा पुं० १. हाथ की चार उँगलियों का समूह । २. चार अंगुल की माप । ३. ताश का वह पत्ता जिसमें चार बूटियाँ हो । या चौसर - संज्ञा पुं० चौपड़ । चौहट्टा - संज्ञा पुं० चौक । चामसिया - वि० वर्षा के चार महीनों में होनेवाला । संज्ञा पुं० वार माशे की बाट । चैमुख - क्रि० वि० चारों ओर । चौमुहानी - संज्ञा स्त्री० चौराहा । चौरंगा - वि० [ बी० चौरंगी] चार रंगों का । चार-संज्ञा पुं० चोर | चौरस - वि० समतल । चौरस्ता - संज्ञा पुं० दे० "चौराहा " । चारा - संज्ञा पुं० [स्त्री० अल्पा० चौरी] चबूतरा । चौहद्दी - -संज्ञा स्त्री० चारों ओर की सीमा । चौहरा - वि० १० चार परतवाला । चौहान - संज्ञा पुं० क्षत्रियों की एक प्रसिद्ध शाखा । चौe - क्रि० वि० चारों ओर । च्युत - वि० गिरा हुआ । च्युति-संज्ञा स्त्री० १. मढ़ना । २. चूक । छ - हिंदी वर्णमाला में चवर्ग का दूसरा व्यंजन जिसके सच्चारण का • स्थान तालु है । छूटना - क्रि० प्र० कटकर अलग होना । छँटवाना- क्रि० स० १. कटवाना । २. चुनवाना । छँटाई - संज्ञा स्त्री० छाँटने का काम, भाव या मज़दूरी । छड़ना- क्रि० स० २. छटना । १. छोड़ना । छँड़ाना - क्रि० स० छीनना । छंद - संज्ञा पुं० १. पथ । २. वह विद्य