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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/२७९

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छाँह छाँह - संज्ञा स्त्री० १. छाया | २. शरण । छाक - संज्ञा स्त्री० तृप्ति । छाकना + - क्रि० प्र० अघाना । क्रि० प्र० हैरान होना । छाग-संज्ञा पुं० बकरा | छागल - संज्ञा पुं० १. बकरा । २. बकरे की खाल की बनी हुई चीज़ । संज्ञा स्त्री० नि । छाछ -संज्ञा बी० मट्ठा । छाज-संज्ञा पुं० सूप | छाजन - संज्ञा पुं० वस्त्र । संज्ञा स्त्री० १. छप्पर । २. छवाई | छाजना- क्रि० प्र० [वि० छाजित ] शोभा देना । वक्ष- छात -संज्ञा पुं० दे० "छाता" । छाता - संज्ञा पुं० बड़ी छतरी । छाती - संज्ञा स्त्री० १, सीना । स्थल | २. कलेजा । ३. स्तन । ४. हिम्मत । छात्र - संज्ञा पुं० शिष्य । छात्रवृत्ति - संज्ञा स्त्री० वह वृत्ति या धन जो विद्यार्थी को विद्याभ्यास की दशा में सहायतार्थ मिला करे । छात्रालय - संज्ञा पुं० विद्यार्थियों के रहने का स्थान । बोर्डिंगहाउस । छादन -संज्ञा पुं० [वि० छादित ] १. छाने या ढकने का काम । आवरण | २७१ २० छान -संज्ञा स्त्री० छप्पर । छानना - क्रि० स० १. चूर्ण या तरल पदार्थ को महीन कपड़े या और किसी छेददार वस्तु के पार निका- लना जिसमें उसका कूड़ा-करकट चिकल जाय । २. बिलगाना । ३. छानबीन - संज्ञा स्त्री० जाँच-पड़ताल । छिछुकारना छाना - क्रि० स० १. आच्छादित करना । २. बिछाना । क्रि० प्र० फैलना । छाप - संज्ञा स्त्री० वह चिह्न जो छापने में पड़ता है । छापना- क्रि० स० १. स्याही आदि पुती वस्तु को दूसरी वस्तु पर रख- कर उसकी श्राकृति चिह्नित करना । २. मुद्रित करना । छापा - संज्ञा पुं० १. र्साचा जिस पर गीली स्याही आदि पोतकर उस पर चिह्नों की प्रकृति किसी वस्तु पर उतारते हैं । २. आक्रमण । छापाखाना -संज्ञा पु० मुद्रालय । प्रेस | छाया - संज्ञा स्त्री० १. साया । २. परछाई । छायापथ - संज्ञा पुं० श्राकाश-गंगा । छार - संज्ञा पुं० १. खारी नमक । २० राख । छाल - संज्ञा खो० वल्कल ! छालना - क्रि० प्र० छानना । छाला - संज्ञा पुं० १. छाल या चमड़ा । २. फफोला । छालिया, छाली-संश बी० सुपारी । छावनी - संज्ञा बो० १. छप्पर । २. डेरा । ३. सेना के ठहरने का स्थान । छावा - संज्ञा पुं० बच्चा । छिंड़ाना- क्रि० स० छीनना । छि- भव्य० घृणा, तिरस्कार या अरुचि- सूचक शब्द । छिकनी-संज्ञा स्त्री० नकछिकनी घाल • जिसके फूल घने से छींक आती है। छिगुनी-संज्ञा स्त्री० सबसे छोटी उँगली । छिछकारart- - क्रि० स० दे० "छिड़- कना" ।