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जगन्मोहिनी जगन्मोहिनी -संज्ञा स्त्री० १. दुर्गा । २. महामाया । जगमग, जगमगा - वि० १. प्रकाशित | २. चमकदार | जगमगाना - क्रि० भ० दमकना । जगमगाहट - संज्ञा स्त्री० चमक । जगवाना- क्रि० स० जगाने का काम दूसरे से कराना । जगह-संज्ञा खो० १. स्थान । २. पद । जगात + - संज्ञा पुं० १. दान । २. कर । जगाती । -संज्ञा पुं० वह जो कर वसूल करे जगाना - क्रि० स० १. नींद त्यागने के लिये प्रेरणा करना । २. चेत में लाना । जघन-संज्ञा पुं० चूतड़ । जघन्य - वि० १. अंतिम । २. निकृष्ट | संज्ञा पुं० शूद्र । जचना- क्रि० प्र० दे० " जँचना" । जच्चा-संज्ञा स्त्री० प्रसूता स्त्री । जजमान-संज्ञा पुं० दे० "यजमान" । जज़िया - संज्ञा पुं० १. दंड । २. एक प्रकार का कर जो मुसलमानी राज्य- काल में अन्य धर्मवालों पर लगता था । जज़ोरा - संज्ञा पुं० टापू । जटना- क्रि० स० ठगना । ॐ क्रि० स० जड़ना । जटल - संज्ञा स्त्री० गप्प । जटा - संज्ञा स्त्री० एक में उलझे हुए सिर के बहुत से बड़े बड़े बाल । जगजूट - संज्ञा पुं० १. बहुत से लंबे बालों का समूह। २. शिव की जटा । जटाधर -संज्ञा पुं० शिव । जटाधारी - वि० जो जटा रखे हो । संज्ञा पुं० शिव । जटाना - क्रि० दूसरे से कराना । स० जटने का काम २७७ जड़ मा क्रि० प्र० ठगा जाना | जटायु -संज्ञा पुं० रामायण का एक प्रसिद्ध गीध । जटित - वि० जड़ा हुआ । जटिल - वि० १. जटावाला । २. जठर- संज्ञा पुं० पेट । वि० वृद्ध | जठराग्नि -संज्ञा स्त्री० पेट की वह गरमी जिससे अन्न पचता है । जड़ - वि० १. जिसमें चेतनता न हो । २. मूर्ख । संज्ञा खो० १. मूल । २. हेतु । जड़ता - संज्ञा स्त्री० १. श्रचेतना । २. मूर्खता । जड़त्व -संज्ञा पुं० १. अचेतन । २. मूर्खता । 1 १. एक चीज़ को बैठाना । २. प्रहार जड़ने का काम जड़ना- क्रि० स० दूसरी चीज़ में करना । ३. चुग़ली खाना । जड़वाना- क्रि० स० दूसरे से कराना । जड़ाई -संज्ञा स्त्री० १. जढ़ने का काम या भाव । २. जड़ने की मज़दूरी । जड़ाऊ - वि० जिस पर नग या रत्न आदि जड़े हों । जड़ाना - क्रि० स० दे० " जवाना" । + क्रि० प्र० शीत लगना । जड़ाव -संज्ञा पुं० १. जड़ने का काम या भाव। २. जड़ाऊ काम । जड़ाघर - संज्ञा पुं० गरम कपड़े । जड़ित - वि० जड़ा हुआ । जड़िया - संज्ञा पुं० कुंदनसाज़ | जड़ी - संज्ञा स्त्री० वह वनस्पति जिसकी जड़ औषध के काम में लाई जाय । जडुआ - वि० दे० "जड़ाज" ।