जानकी जानकी-संज्ञा श्री० जनक की पुत्री, सीता । जानदार - वि० सजीव । जानना - क्रि० स० १. परिचित होना । २. सूचना पाना । जानपना + - संज्ञा पुं० बुद्धिमत्ता । जानपनी - संज्ञा स्त्री० बुद्धिमानी । जानमनि-संज्ञा पुं० बड़ा ज्ञानी पुरुष । । २. जानराय - संज्ञा पुं० बड़ा बुद्धिमान् । जानवर - संज्ञा पुं० १. प्राणी । पशु । जानहु । - श्रव्य० माना । जाना- क्रि० प्र० १. बढ़ना । २. हटना । ३. अलग होना । +- क्रि० स० उत्पन्न करना । जानि-संज्ञा स्त्री० स्त्री । वि० जानकार । जानी - वि० जान से संबंध रखनेवाला । संज्ञा स्त्री० प्राणप्यारी । जानु - संज्ञा पुं० घुटना । संज्ञा पुं० जाँघ । जानो - भव्य० माना । २८५ जारण या खट्टा पदार्थ जो दूध में उसे जमा- कर दही बनाने के लिये डाला जाता है । जामना - क्रि० प्र० दे० " जमना" । जामा - संज्ञा पुं० १. पहनावा । २. चुननदार घेरे का एक प्रकार का पहनावा । जामाता -संज्ञा पुं० दामाद । जामिक -संज्ञा पुं० पहरुआ । जामिन, जामिनदार - संज्ञा पुं० ज़मा- नत करनेवाला । जामिनी-संज्ञा स्त्री० दे० "यामिनी"। संज्ञा स्त्री० दे० "ज़मानत " | जामुन - संज्ञा पुं० एक सदाबहार पेड़ जिसके फल बैंगनी या बहुत काले होते हैं और खाए जाते हैं । जामुनी - वि० जामुन के रंग का । जाय । - श्रव्य० वृथा । वि० उचित । जायका -संज्ञा पुं० [वि० जायक ेदार ] स्वाद | जायचा- संज्ञा पुं० जन्मपत्री जायज़ - वि० उचित । मुनासिब । जायज्ञा-संज्ञा पुं० जाँच | जाप - संज्ञा पुं० नाम श्रादि जपने की जायदाद - संज्ञा स्त्री० संपत्ति । क्रिया | जापक-संज्ञा पुं० जप करनेवाला । जापा -संज्ञा पुं० सौरी । जापी-संज्ञा पुं० दे० "जापक" । जाफ+ - संज्ञा पुं० बेहोशी । ज़ाफ़त - संज्ञा स्त्री० भोज । जाफरान - संज्ञा पुं० केसर । जाब्ता - संज्ञा पुं० नियम । जाम-संज्ञा पुं० पहर । 1 संज्ञा पुं० प्याला । संज्ञा पुं० दे० "जामुन" । जायनमाज़ - संज्ञा स्त्री० छोटी दरी या बिछौना जिस पर बैठकर मुसलमान नमाज़ पढ़ते हैं । जाया-संज्ञा स्त्री० पत्नी । जाया - वि० ख़राब । जार-संज्ञा पुं० श्राशना । वि० मारने या नाश करनेवाला । जारकर्म-संज्ञा पुं० व्यभिचार । जारज-संज्ञा पुं० किसी स्त्री की वह संतान जो उसके उपपत्ति से उत्पन्न हुई हो । जामन - संज्ञा पुं० वह थोड़ा सा दही जारण-संज्ञा पुं० जलाना ।
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