जित जित - वि० जीता हुआ । संज्ञा पुं० जीत । + क्रि० बि० जिधर । जितना - वि० [ खी० जितनी ] जिस मात्रा का । क्रि० वि० जिस मात्रा में । जितवैया | - वि० जीतनेवाला । जिताना - क्रि० स० जीतने में सहायता करना । जितेंद्रिय - वि० जिसने अपनी इंद्रियों को वश में कर लिया हो । जितेो+ - वि० जितना । क्रि० वि० जिस मात्रा में । जित्वार - वि० जेता । ज़िद संज्ञा स्त्री० [वि० जिद्दी ] हठ | ज़िद्दी - वि० हठी | जिधर - क्रि० वि० जिस श्रोर । जिन-संज्ञा पुं० जैनों के तीर्थंकर । वि० सर्व ० " जिस" का बहुवचन । संज्ञा पुं० मुसलमान भूत । जिना -संज्ञा पुं० व्यभिचार । २८७ जिम्मेवार -संज्ञा पुं० दे० "जिम्मा- वार" । जिय-संज्ञा पुं० मन । जियन -संज्ञा पुं० जीवन । जियरा 1-संज्ञा पुं० जीव । ज़ियान - संज्ञा पुं० घाटा । जियाना + - क्रि० स० जिलाना । ज़िरगा -संज्ञा पुं० १. झुंड । २. १. हुज्जत । २. मंडली । जिरह -संज्ञा स्त्री० अदालत के प्रश्न | ज़िरह-संज्ञा स्त्री० थकतर । ज़िरहो - वि० कवचधारी । जिला -संज्ञा पुं० प्रांत | जिलाना - क्रि० स० १. जीवन देना । + २. पालना । जिलासाज़-संज्ञा पुं० हथियारों आदि पर श्रीप चढ़ानेवाला । जिलाह: -संज्ञा पुं० अत्याचारी । जिल्द - संज्ञा स्त्री० [ वि० जिल्दो ] १. खाल । २. वह पट्टा या दफ़्ती जो किसी किताब के ऊपर उसकी रक्षा जिनाकार - वि० [ संज्ञा जिनाकारी ] के लिये लगाई जाती है । ३. पुस्तक व्यभिचारी । जिनि |- अव्य० मत | जिन्हा सर्व० दे० "जिन" । जिन्भा, जिभ्या-संज्ञा स्त्री० दे० "जिह्वा" । जिमाना - क्रि० स० भोजन कराना । जिमि - क्रि० वि० जैसे । जिम्मा - संज्ञा पुं० जवाबदिही । की एक प्रति । जिल्द बंद - संज्ञा पुं० जिल्द बांधनेवाला । जिल्दसाज़ -संज्ञा पुं० दे० "जिल्द- बंद” । जिल्लत-संज्ञा खो० १. अनादर । २. दुर्गति । जिव-संज्ञा पुं० दे० "जीव" । जिवाना - क्रि० स० दे० "जिळाना" ज़िम्मादार - संज्ञा पुं० दे० "ज़िम्मा - जिस - वि० 'जो' का वह रूप जो उसे वार" | ज़िम्मावार-संज्ञा पुं० उत्तरदाता । ज़िम्मावारी - संज्ञा स्त्री० जवाबदिही । विभक्तियुक्त विशेष्य के साथ माने से प्राप्त होता है । सर्व ० 'जो' का वह रूप जो उसे
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