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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३०४

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झकाझक वचन कहना | भकाभक - वि० उज्ज्वल । भकुराना + - क्रि० प्र० भूमना । क्रि० स० झूमने में प्रवृत्त करना । भकोर | संज्ञा पुं० १. हवा का झोका । २. फटका | झकोरना- क्रि० भ० हवा का झोंका मारना । झकोरा - संज्ञा पुं० हवा का झोंका | भकोल + - संज्ञा पुं० दे० "कार" । भाड़-संज्ञा पुं० तेज धी । वि० दे० "फक्की" । झक्की - वि० १. बहुत बकबक करने- वाला । २. सनकी । भक्खना- क्रि० प्र० दे० "झी- खना" । भख-संज्ञा स्त्री० भीखने का भाव या क्रिया । भखना:- क्रि० प्र० दे० "झीखना" । भखी : संज्ञा स्त्री० मछली । झगड़ना - क्रि० प्र० झगड़ा करना । झगड़ा - संज्ञा पुं० तकरार | झगड़ालू - वि० कलहप्रिय । झगड़ी - संज्ञा स्त्री० दे० "झगड़ालू” । भगराऊ + - वि० दे० " झगड़ालू" । भगरी+-संज्ञा स्त्री० दे० "भंग- ड़ लू” । भज्भर -संज्ञा स्त्री० कुछ चौड़े मुँह का पानी रखने का मिट्टी का एक प्रकार का बरतन । भभक-संज्ञा स्त्री ० १. भड़क । २. भु झलाहट । भभकन-संशास्त्री० दे० "झकक" । भभकना- क्रि० प्र० १. भड़कना । २. ॐफलाना । झभकाना- क्रि० स० भड़काना । २६६ भनाभन झभकारना- क्रि० स० [ कफकार] १. डपटना । २. तुच्छ समझना । भट - क्रि० वि० तुरंत । भटकना - क्रि० स० १. फटका देना । २. एठना । भटका - संज्ञा पुं० झोंका | भटकारना- क्रि० स० दे० " फटकना " | झटपट - अव्य० तुरंत । - झटिति:- क्रि० वि० १. झट | २. बिना समझे बूझे | झड़ - संज्ञा स्त्री० दे० " झड़ी" । भड़न - संज्ञा स्त्री० १. कढ़ी हुई चीज़ । २. झड़ने की क्रिया या भाव। झड़ना- क्रि० प्र० किसी चीज़ से उसके छोटे छोटे श्रंगों का टूटकर गिरना । झडप - संज्ञा स्त्री ० १. मुठभेड़ । २. श्रावेश | झड़पना- क्रि० अ० १. श्राक्रम करना । २. फटकना । भड़वाना- क्रि० स० झाड़ने का काम दूसरे से कराना । झडाझड़ - क्रि० वि० लगातार । झड़ी-संज्ञा स्त्री० १. लगातार झड़ने की क्रिया । २. छोटी बूँदों की लगा- तार वर्षा । झन -संज्ञा स्त्री० धातु से टुकड़े के बजने की ध्वनि । झनक- संज्ञा स्त्री० झनझन शब्द । झनकना- क्रि० अ० झनकार का शब्द करना । झनकार - संज्ञा स्त्री० दे० "भंकार" | झनझनाना- क्रि० प्र० झनमन शब्द होना । क्रि० स० झनझन शब्द उत्पन्न करना । भनाभन - संज्ञा स्त्री० मंकार । क्रि० वि० झनझन शब्द सहित ।