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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३०७

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भांखना झखना* +-क्रि० प्र० दे० "झींखना"। भांगला - वि० ढीला डाला । भाँझ-संज्ञा स्त्री० १. माल । २. माँझन । भाँझड़ी+ -संज्ञा स्त्री० दे० "- झन" । झांझन - संज्ञा स्त्री० पैर में पहनने का एक प्रकार का गहना । पैजनी । झांझर - संज्ञा स्त्री० १. झझिन । २. छलनी । वि० १. पुराना । २. छेदवाला । भौभरी - संज्ञा स्त्री० १ झाँझ बाजा । . २. कफिन नामक गहना । झाँप - संज्ञा स्त्री० १. वह जिससे कोई चीज़ ढकी जाय । २. नींद। ३. पर्दा । संज्ञा पुं० उछल-कूद | भाँपना- क्रि०स० पकड़कर दबा लेना । झाँपना- क्रि० स० १. ढकिना । २. पना । लजाना । शरमाना । २६६ झाँपी | -संज्ञा स्त्री० १. ढकने की टोकरी । २. मूज की पिटारी । झाँवली -संज्ञा स्त्री० १. झलक । २. आँख की कनखी । भांव-संज्ञा पुं० जली हुई ईंट जिससे रगड़कर मैल छुड़ाते हैं । झाँसना - क्रि० स० ठगना । झांसा - संज्ञा पुं० धोखा-धड़ी । -संज्ञा पुं० मैथिल और गुजराती ब्राह्मणों की एक उपाधि | भाग - संज्ञा पुं० पानी श्रादि का फेन । भागड़ -- संज्ञा पुं० दे० "झगड़ा " । झाड़-संज्ञा पुं० वह छोटा पेड़ या पौधा जिसकी डालियाँ जड़ या ज़मीन के बहुत पास से निकलकर चारों ओर खूब छितराई हुई हों । संज्ञा स्त्री० १. फाड़ने की क्रिया । २. फटकार । झाड़खंड -संज्ञा पुं० जंगल | । भारना झाड़ भंखाड़ - संज्ञा पुं० १. काँटेदार झाड़ियों का समूह । २. निकम्मी चीज़ । झाड़दार - वि० १. सधन । २. कँटीला । झाड़न -संज्ञा स्त्री० १. वह जो फाड़ने पर निकले । २. वह कपड़ा जिससे कोई चीज फाड़ी जाय । झाड़ना - क्रि० स० १. छुड़ाना । २. अपनी योग्यता दिखलाने के लिये गढ़ गढ़कर बातें करना । क्रि० स० १. किसी चीज पर पड़ी हुई गर्द आदि साफ करने के लिये उसको उठाकर भटका देना । २. फटकना । ३. डांटना । झाड़ बुहार-संज्ञा स्त्री० सफ़ाई । झाड़ा - सज्ञा पुं० १. झाड़ फूँक । २. तलाशी । ३. मल । ४. पाखाना । झाडी - संज्ञा बी० १. पौधा I २. छोटे पेड़ों का समूह । झाड़ -संज्ञा पुं० १. बुहारी । २. पुच्छल तारा । झापड़-संज्ञा पुं० थप्पड़ । भाबर - संज्ञा पुं० दे० "झाबा" 1 भाबा-संक्षा पुं० टोकरा । भायँ झायँ -संज्ञा स्त्री० १. फनकार । २. वह शब्द जो किसी सुनसान स्थान में हो । भावँ भाव -संज्ञा खी० चकवाद । भार | - वि० १. केवल । २. समस्त । । संज्ञा पुं० समूह | संज्ञा खी० १. दाह । २. ईर्ष्या । ३. श्रच । भारना- क्रि० स० करने के लिये कंघी १. बाल साफ- करना । २.