टूठना । टूठना- क्रि० प्र० संतुष्ट होना । टूठनि - संज्ञा खी० संतोष । ट्रम-संज्ञा स्त्री० १. गहना । २. ताना । टे-संज्ञा स्त्री० तोते की बोली । टेट-संज्ञा स्त्री० मुर्री । । टेंटर - संज्ञा पुं० रोग या चोट के कारण आँख के डेले पर का उभरा हुआ मांस । टेटी -संज्ञा स्त्री० करील । संज्ञा पुं० हुज्जती । टेंटुषा - संज्ञा पुं० १. गल्ला । २. अँगूठा । । टेट - संज्ञा स्त्री० १. ताते की बोली । २. व्यर्थ की बकवाद । देउकी संज्ञा स्त्री० किसी वस्तु को लुढ़कने या गिरने से बचाने के लिये उसके नीचे लगाई हुई वस्तु | टेक-संज्ञा स्त्री० १. वह लकड़ी जो किसी भारी वस्तु को टिकाए रखने के लिये नीचे से लगाई जाती है । २. प्राश्रय । ३. हठ । ४. श्रादत । टेकना - क्रि० स० सहारा लेना । टेकरा -संज्ञा पुं० [स्त्री० अल्पा० टेकरी ] टीला | टेकान - संज्ञा स्त्री० टेक | टेकाना - क्रि० स० १. उठाकर ले जाने में सहारा देने के लिये थामना । २. उठने बैठने में सहायता के लिये पकड़ना । ३०८ टेकी - संज्ञा पुं० १. प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहनेवाला । २. हठी | टेकुश्रा / - संज्ञा पुं० चरखे का तकला | टेधरना । - क्रि० प्र० दे० " पिघलना"। टेढ़बड़ंगा - वि० टढ़ा-मेढ़ा | टेढ़ा - वि० [स्त्री० टेढ़ी ] १. वक्र । २. पेचीला | टोनह टेढ़ाई - संज्ञा स्त्री० दे० "टेढ़ापन" । टेढ़ापन - संज्ञा पुं० टेढ़ा होने का भाव । टेढ़े - क्रि० वि० घुमाव फिराव के साथ । देना - कि० स० १. हथियार को तेज़ करने के लिये पत्थर आदि पर रंग- इना । २. मूँछ के बालों को खड़ा करने के लिये ऐंठना । टेम-संज्ञा स्त्री० दिए की है। । टेर - संज्ञा स्त्री० तान । टेरना- क्रि० स० ऊँचे स्वर से गाना | देव-संज्ञा स्त्री० श्रादत । टेसू-संज्ञा पुं० पलाश । टैया-संज्ञा बी० एक प्रकार की चिपटी छोटी कौड़ी । टोंटा - संज्ञा पुं० [स्त्री० टोटी ] पानी भादि ढालने के लिये बरतन में लगी हुई नली । टोक -संज्ञा खो० टोकने की क्रिया या भाव । टोकना - क्रि० स० किसी को कोई काम करते हुए देखकर उसे कुछ कहकर रोकना या पूछ ताछ करना । संज्ञा पुं० [स्त्री० टोकनी ] टोकरा । टोकरा - संज्ञा पुं० [स्त्री० टोकरी] झाबा | टोकरी-संज्ञा स्त्री० छोटा टोकरा । टोटका -संज्ञा पुं० टोना । टाटा-संज्ञा पुं० कारतूस | संज्ञा पुं० घाटा । टोनहा - वि० [स्त्री० टोनही ] जादू करनेवाला | टोनहाया - संज्ञा पुं० [स्त्री० टोनहाई ] जादू करनेवाला मनुष्य । टोना-संज्ञा पुं० जादू | + क्रि० स० छूना ।
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