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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३५५

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त्रिभुवन ३४७ तीन भुजाओं या रेखाओं से घिरा हो । त्रिभुवन - संज्ञा पुं० तीनों लोक । जिमात्रिक - वि० जिसमें तीन मात्राएँ हैं। । त्वरित वि० जिसके तीन सिर हो । त्रिशूल - संज्ञा पुं० एक प्रकार का अन जिसके सिरे पर तीन फल होते हैं । त्रिसंध्य - संज्ञा पुं० प्रातः, मध्याह्न और सायं ये तीनों काल । त्रिमूति-संज्ञा पुं० ब्रह्मा, विष्णु और त्रिसंध्या-संज्ञा खो० प्रातः शिव ये तीनों देवता । त्रिया - संज्ञा स्त्री० औरत । त्रियामा - संज्ञा स्त्री० रात्रि | त्रियुग - संज्ञा पुं० १. विष्णु । २. सत्य- युग, द्वापर और त्रेता ये तीनों त्रिलोक - संज्ञा पुं० स्वर्ग, महर्य और युग । पाताल ये तीनों लोक । त्रिलोकनाथ - संज्ञा पुं० ईश्वर । त्रिलोकपति -संज्ञा पुं० दे० "त्रिलोक- नाथ" । त्रिलोकी - संज्ञा खा० दे० " त्रिलोक" । त्रिलोचन -संज्ञा पुं० शिव । त्रिविध - वि० तीन प्रकार का । क्रि० वि० तीन प्रकार से । त्रिवेणी - संज्ञा स्त्री० १. तीन नदियों का संगम । २. गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम-स्थान जो प्रयाग में है । त्रिवेदी - संज्ञा पुं० १. ऋक्, यजुः और साम इन तीनों वेदों का जाननेवाला । २. ब्राह्मणों का एक भेद । त्रिवेनी-संज्ञा स्त्री० दे० " त्रिवेणी" | त्रिशंकु -संज्ञा पुं० एक प्रसिद्ध सूर्य्य- वंशी राजा जिन्होंने सशरीर स्वर्ग स्वर्ग जाने की कामना से यज्ञ किया था, पर जो देवताओं के विरोध करने के कारण स्वर्ग न पहुँच सके थे और बीच आकाश में रुक गए थे त्रिशिर - संज्ञा पुं० १. रावण का एक भाई । २. कुबेर । स्त्री० मध्याह्न और सायं ये तीनों संध्याएँ । त्रिस्थली- संज्ञा स्त्री० काशी, गया और प्रयाग ये तीन पुण्य स्थान । त्रिस्रोता - संज्ञा स्त्री० गंगा । त्रुटि - संज्ञा स्त्री० १. कमी । २. अभाव । ३ भूल । त्रुटी - संज्ञा स्त्री० दे० " त्रुटि" । त्रेतायुग -संज्ञा पुं० चार युगों में से दूसरा युग जो १२६६००० वर्ष का होता है । त्र - वि० तीन । त्रैगुण्य-संज्ञा पुं० सत्व, रज और तम इन तीनों गुणों का धर्म या भाव । त्रैराशिक -संज्ञा पुं० गणित की एक क्रिया जिसमें तीन ज्ञात राशियों की सहायता से चौथी अज्ञात राशि का पता लगाया जाता है । त्रैलोक्य-संज्ञा पुं० स्वर्ग, मर्त्य और पाताल ये तीनों लोक । त्रैवार्षिक - वि० जो हर तीसरे वर्ष हो । त्र्यंबक -संज्ञा पुं० शिव । त्र्यंबका-संज्ञा स्त्री० दुर्गा । त्वक - संज्ञा पुं० १. छिलका। २. स्वच्चा । त्वचा - संज्ञा स्त्री० १. चमड़ा। २. छाल । त्वदीय-सर्व ० तुम्हारा | त्वरा-संज्ञा स्त्री० शीघ्रता । त्वरावान् - वि० जल्दबाज़ | त्वरित - वि० तेज़ | क्रि० वि० शीघ्रता से ।