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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३५६

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थ - हिंदी वर्णमाला का सत्रहवाँ व्यं- जन वर्ण और त वर्ग का दूसरा अक्षर । इसका उच्चारण-स्थान दंत है । थंब, थंभ -संज्ञा पुं० [स्त्री० थंबी ] १. खंभा । २. सहारा । थंभन - संज्ञा पुं० १. रुकावट । २. दे० " स्तंभन" । थंभना :- क्रि० प्र० दे० " थमना" | + थंभित - वि० १. ठहरा हुआ । २. अचल । थकना - क्रि० भ० १. शिथिल होना । २. चलता न रहना । थकान-संज्ञा बी० थकावट । थकाना - क्रि० स० परिश्रम से अशक्त कराना । थका-माँदा - वि० श्रांत । थकावट, थकाहट - संज्ञा स्त्री० शिथि- लता । थकित - वि० थका हुश्श्रा । थकौहाँ+ - वि० [ खो० थकौहीं ] थका- माँदा । थक्का -सज्ञा पुं० [ स्त्री० थक्को, थकिया ] गाढ़ी चीज़ की जमी हुई मोटी तह । थगित - वि० ठहरा हुआ । थति | -संज्ञा स्त्री० दे० "थाती" । थन - संज्ञा पुं० चौपायों की चूची । थनी - संज्ञा स्त्री० स्तन के आकार की दो थैलियाँ जो बकरियों के गल्ले के नीचे लटकती हैं । थनैत- संज्ञा पुं० गाँव का मुखिया । थपकना - क्रि० स० १. प्यार से या आराम पहुँचाने के लिये किसी के शरीर पर धीरे धीरे हाथ मारना । २. धीरे धीरे ठोकना । ३४८ थ थांगी थपकी -संज्ञा खो० हाथ से धीरे धीरे ठोंकने की क्रिया । थपथपी -संज्ञा खो० दे० "थपकी" । थपन -संज्ञा पुं० स्थापन । थपना - क्रि० स० स्थापित करना । क्रि० प्र० स्थापित होना । थपेड़ा - संज्ञा पुं० १. थप्पड़ । २. आघात । थप्पड़ - संज्ञा पुं० तमाचा । थमना- क्रि० प्र० रुकना । थरकना- क्रि० प्र० डर से काँपना । थरथर - संज्ञा स्त्री० डर से कांपने की मुद्रा । क्रि० वि० कांपने की पूरी मुद्रा से I थरथराना- क्रि० प्र० काँपना । थरथरी - संज्ञा खो० कँपकँपी । थर्राना- क्रि० भ० डर के मारे काँपना । थल - संज्ञा पुं० १. जगह । २. वह ज़मीन जिस पर पानी न हो । थलचर - संज्ञा पुं० पृथ्वी पर रहनेवाले जीव । थलथल - वि० मोटाई के कारण भूलता या हिलता हुआ । थलरुह - वि० धरती पर उत्पन्न होने- वाले जंतु, वृक्ष आदि । थली - संज्ञा स्त्री० स्थान | थवई - संज्ञा पुं० राज | थहना- क्रि० स० थाह लेना । थहराना /- क्रि० प्र० काँपना । थहाना- क्रि० स० थाह लेना । थांग -संज्ञा खी० १. चोरों या डाकुभों का गुप्त स्थान । २. खोज । थाँगी संज्ञा पुं० १. चोरी का माल मोल लेने या अपने पास रखनेवाला