थांवला आदमी । २. जासूस । थांबला - संज्ञा पुं० घाला । था- क्रि० प्र० रहा । थाक-संज्ञा पुं० ढेर | थाकना - क्रि० प्र० दे० " थकना " । थात - वि० स्थित । थाति -संज्ञा स्त्री० दे० "थाती" । थाती - संज्ञा स्त्री० १. पूँजी । धरोहर । २. थान- संज्ञा पुं० जगह । थाना - संज्ञा पुं० १. टिकने या बैठने का स्थान । २. वह स्थान जहाँ अप- राधों की सूचना दी जाती है और कुछ सरकारी सिपाही रहते हैं । पुलिस की घड़ी चौकी । थानेदार - संज्ञा पुं० थाने का प्रधान . । अफ़सर । थाप-संज्ञा स्त्री० १ थपकी । २. थप्पड़ । ३. छाप । थापन -संज्ञा पुं० रखना । थापना- क्रि० स० बैठाना । संज्ञा स्त्री० स्थापन | थापी - संज्ञा स्त्री० वह चिपटी मुँगरी जिससे राज या कारीगर गव पीटते हैं । थाम-संज्ञा पुं० खंभा । संज्ञा स्त्री० पकड़ । थामना - कि० सं० १. किसी चलती हुई वस्तु को रोकना । २. पकड़ना । थायी - वि० दे० " स्थायी" । थाल - संज्ञा पुं० बड़ी थाली । थाळा - संज्ञा पुं० वह गड्ढा जिसके - भीतर पौधा लगाया जाता है । थाली-संज्ञा बी० बड़ी तश्तरी । थाह - संज्ञा स्त्री० १. गहराई का मंत या हद । २. सीमा । ३४६ थुरहथा थाहना- क्रि० स० थाह लेना । थिंगली - संज्ञा स्त्री० चकती । थित - वि० ठहरा हुआ । थिति-संज्ञा स्त्री० ठहराव । थिर - वि० १. स्थिर । २. शांत । ३. स्थायी । थिरक-संज्ञा पुं० नृत्य में चरणों की चंचल गति । थिरकना- क्रि० प्र० नाचने में पैरों को क्षण क्षण पर उठाना और रखना । थिरजीह - संज्ञा पुं० मछली । थिरता - संज्ञा स्त्री० १. ठहराव । २. शांति । थिरताई - संज्ञा स्त्री० दे० "थिरता | थिरना- क्रि० प्र० १. पानी या और किसी द्रव पदार्थ का हिलना- डोलना बंद होना । २. जल के स्थिर होने के कारण उसमें घुली हुई वस्तु का तल में बैठना । थिरा -संज्ञा स्त्री० पृथ्वी । थिराना- क्रि० स० १. जल को स्थिर करके उसमें घुली हुई वस्तु को नीचे बैठने देना । २. किसी वस्तु को जल में घोलकर और उसकी मैल आदि को नीचे बैठाकर साफ़ करना । थुकाना - क्रि० स० १. थूकने की क्रिया दूसरे से कराना । वाना | २. उगल- थुक्का फजीहत- संज्ञा स्त्री० १. निंदा और तिरस्कार । २. बड़ाई-झगड़ा । थुड़ी-संज्ञा स्त्री० धिक्कार | थुरहथा - वि० [स्त्री० थुरइथी ] १. जिसके हाथ छोटे हो । २. किफा- यत करनेवाला | ।
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