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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३५८

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थू थू - अव्य० १. थूकने का शब्छ । २. छिः । थूक - संज्ञा पुं० खखार । थूकना - क्रि० प्र० मुँह से थूक निका- लना या फेंकना । क्रि० स० १. उगलना । २. बुरा कहना । थूथन - संज्ञा पुं० लंबा निकला हुआ मुह । ३५० दंडवास की मुद्रा और ताल | थैला - संज्ञा पुं० [स्त्री० अल्पा० थैलो ] कपड़े आदि को सीकर बनाया हुआ पात्र जिसमें कोई वस्तु भरकर बंद कर सकें । । थैलो - संज्ञा स्त्रो० छोटा थैला थोक - संज्ञा पुं० १. ढेर । २. समूह | ३. इकट्ठी वस्तु । थोड़ा - वि० [स्त्री० थोड़ी ] अल्प | कि० वि० तनिक | थूनी - संज्ञा स्त्री० १. थम । २. वह थोथरा - वि० दे० " थोथा " । थून -संज्ञा स्त्री० थूनी । खंभा जो किसी बोझ को रोकने के थोथा - वि० [स्त्री० थोथा ] १. पोला । लिये नीचे से लगाया जाय । थूरना | - क्रि० स० १. कूटना । २. मारना । ३. ठूसना | थूल - वि० १. मोटा । २. भद्दा | थूला - वि० [स्त्री० धूली ] मोटा | थेईथेई - वि० थिरक-थिरककर नाचने २. कुंठित । ३. निकम्मा | थोपड़ी - संज्ञा स्त्री० चपत । थोपना- क्रि० स० छोपना । थोबड़ा - संज्ञा पुं० जानवरों का थूथन । थोर, थोग + - वि० दे० "थोड़ा" । थोरिक - वि० थोड़ा सा । द- संस्कृत या हिंदी वर्णमाला में श्रठारहव व्यंजन जो त वर्ग का तीसरा वर्ण है। दंतमूल में जिह्वा के अगले भाग के स्पर्श से इसका उच्चारण होता है दंग - वि० विस्मित | 1 संज्ञा पुं० घबराहट । दंगई - वि० १. दंगा करनेवाला । २. प्रचंड | दंगल - संज्ञा पुं० १. मल्लयुद्ध का स्थान । २. दल । दंगा-संज्ञा पुं० झगड़ा । दंड -संज्ञा पुं० १. डंडा । २. कसरत जो हाथ पर के पंजों के बल औंधे होकर की जाती है । ३. सज़ा । ४. लंबाई की एक माप जो चार हाथ की होती थी । ५. घड़ी । दंडक - संज्ञा पुं० १. डंडा । २. शा- सक । ३. वह छंद जिसमें वर्णों की संख्या २६ से अधिक हो । दंडकला - संज्ञा स्त्री० एक प्रकार का मात्रिक छंद । दंडकारण्य - संज्ञा पुं० वह प्राचीन वन जो विध्य पर्वत से लेकर गोदावरी के किनारे तक फैला था । दंडदास - संज्ञा पुं० वह जो दंड का