यच्छ इच्छ-संज्ञा पुं० दे० "दक्ष" । दच्छुकुमारी - संज्ञा स्त्री० दक्ष प्रजा- पति की कन्या, सती । दच्छना - संज्ञा स्त्री० दे० "दक्षिणा" । दच्छता-संज्ञा स्त्री० दत्त की कन्या, सती । दच्छिन- वि० दे० " दक्षिण" । दढ़ियल - वि० दाढीवाला । दंतधन- संज्ञा स्त्री० दे० " दतुधन" । दतिया - संज्ञा स्त्री० छोटा दाँत । दतुश्रन, दतुवन-संज्ञा स्त्री० १. दा- तुन । २. दाँत साफ़ करने और मुँह धोने की क्रिया । दतान-संधा स्त्री० दे० " दतुवन" । दत्त - संज्ञा पुं० दत्तक । वि० दिया हुआ । दस्तक - संज्ञा पुं० गोद लिया हुआ लड़का | । दत्तचित्त - वि० जिसने किसी काम में खूब जी लगाया हो । दत्तात्मा -संज्ञा पुं० वह जो स्वयं किसी के पास जाकर उसका दत्तक पुत्र बने । दन्तोपनिषद् -संज्ञा पुं० एक उपनिषद् | ददा - संज्ञा पुं० दे० "दादा" । ददिया ससुर-संज्ञा पुं० [स्त्री० ददिया सास ] पत्नी या पति का दादा । ददिहाल - संज्ञा पुं० १. दादा का कुल । २. दादा का घर । ददोरा -संज्ञा पुं० चकत्ता । दद्रु -संज्ञा पुं० दाद रोग । दधि-संज्ञा पुं० दही ।
- संज्ञा पुं० समुद्र |
दधिजात-संज्ञा पुं० मक्खन । संज्ञा पुं० चंद्रमा । ૩ ३५३ दधिसुत - संज्ञा पुं० १. मोती । ३. चंद्रमा । दैत्य । ५. विष । दफन कमल । २. ४. जालंधर संज्ञा पुं० मक्खन । दधिसुता -संज्ञा बी० सीप । दधीचि -संज्ञा पुं० एक वैदिक ऋषि जो यास्क के मत से अथर्व के पुत्र थे और इसी लिये दधीचि कहलाते थे । एक बार वृत्रासुर के उपद्रव करने पर इंद्र ने अस्त्र बनाने के लिये दधीचि से उनकी हड्डियाँ माँगीं । दधीचि ने इसके लिये अपने प्राण त्याग दिए । तभी से ये बड़े भारी दानी प्रसिद्ध हैं 1 दनदनाना- क्रि० प्र० दनदन शब्द करना । दनादन - क्रि० वि० दनदन शब्द साथ । दनु-संज्ञा बी० दक्ष की एक कन्या जो कश्यप को ब्याही थी । दनुज-संज्ञा पुं० असुर । दनुजदलनी - संज्ञा स्त्री० दुर्गा | दनुजराय - संज्ञा पुं० दानवों का राजा हिरण्यकशिपु । दनुजेंद्र - संज्ञा पुं० रावण । दन- संज्ञा पुं० "दन" शब्द जो तोप श्रादि के छूटने से होता है । दपटना- क्रि० प्र० [संज्ञा दपट] डांटना | दपु -संज्ञा पुं० दर्प । दपेट - संज्ञा स्त्री० दे० " दफ्ट" | दफ्तर - संज्ञा पुं० दे० " दफ्तर" । दफ़्ती - संज्ञा श्री० गत्ता । दफन -संज्ञा पुं० किसी चीज़ को, विशे- षतः मुरदे को, ज़मीन में गाड़ने की क्रिया ।