दशा सुगंध द्रव्यों के मेल से बनता है। दशा - संज्ञा स्त्री० प्रवस्था | दशानन - संज्ञा पुं० रावण । दशाश्वमेध - संज्ञा पुं० १. काशी के अंतर्गत एक तीर्थ । २. प्रयाग के अंतर्गत त्रिवेणी के पास एक पवित्र घाट, जहाँ से यात्री जल भरते हैं । दशाह -संज्ञा पुं० १. दस दिन । २. मृतक के कृत्य का दसवीं दिन । दस - वि० जो गिनती में नौ से एक अधिक हो । दसखत | -संज्ञा पुं० दे० " दस्तखत " | दसन - संज्ञा पुं० दे० "दशन" । दसना- क्रि० भ० फैलना । क्रि० स० बिछाना । संज्ञा पुं० बिछौना | दसमाथ - संज्ञा पुं० रावण । दसमी-संज्ञा स्त्री० दे० "दशमी" । दसा - संज्ञा स्त्री० दे० "दशा" । दसारन-संज्ञा पुं० दे० " दशार्ण" । दसौंधी - संज्ञा पुं० भाट । दस्तंदाजी - संज्ञा स्त्री० हस्तक्षेप | दस्त-संज्ञा पुं० पतला पायख़ाना | दस्तकार - संज्ञा पुं० हाथ से कारीगरी का काम करनेवाला आदमी । दस्तकारी - संज्ञा स्त्री० हाथ की कारी- गरी । दस्तखत - संज्ञा पुं० हस्ताक्षर । दस्ता - संज्ञा पुं० १. वह जो हाथ में श्रावे या रहे । २. मूठ । ३. फूलों का गुच्छा । ४. गारद । १. काग़ज़ के चौबीस या पचीस तावों की गड़ी। दस्ताना -संज्ञा पुं० हाथ का मोज़ा । दस्तावर - वि० जिससे दस्त आवें । दस्तावेज़ - संज्ञा स्त्री० वह कागज़ जिसमें कुछ श्रादिमियों के बीच के ३५६ दहर व्यवहार की बात लिखी हो और जिस पर व्यवहार करनेवालों के दस्तखत हों । दस्ती - वि० हाथ का । संज्ञा स्त्री० १. मशाल । २. छोटा बेट | दस्तूर - संज्ञा पुं० १. रीति । २. नियम । ३. पारसियों का पुरोहित जो कर्म- कांड कराता है। दस्तूरी -संज्ञा स्त्री० वह दृष्य जो नौकर अपने मालिक का सौदा लेने में दूकानदारों से हक़ के तौर पर पाते हैं । दस्यु - संज्ञा पुं० डाकू । दह - संज्ञा पुं० १. नदी में वह स्थान जहाँ पानी बहुत गहरा हो । कुंड । संज्ञा स्त्री० ज्वाला | दहक - संज्ञा स्त्री० १. धधक । २. ज्वाला । दहकना - क्रि० भ० १. धधकना । २. तपना । दहकाना- क्रि० स० १. धधकाना । २. भड़काना । दहन - संज्ञा पुं० [वि० दहनीय, दलमान ] १. दाह । २. अग्नि । दहना- क्रि० प्र० १. जलना । २. कुढ़ना । I । क्रि० स० जलाना । क्रि० प्र० धँसना | वि० दे० " दहिना" । दहनि + - संज्ञा स्त्री० जलन । दहपट - वि० १. ढाया हुआ । २. रौंदा । हुआ । दहपटना- क्रि० स० १. ध्वस्त करना । २. रौंदना । दहर - संज्ञा पुं० १. नदी में गहरा
पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३६७
दिखावट