बहरना स्थान । २. कुंड । दहरना- क्रि० प्र० दे० "दहलना" । क्रि० स० दे० "दहलाना" । दद्दल - संज्ञा स्त्री० डर से एकबारगी काँप उठने की क्रिया । दहलना- क्रि० प्र० डर से एकबारगी काँप उठना । दहला - संज्ञा पुं० ताश या गंजीफे का वह पत्ता जिसमें दस बूटियाँ हों । + संज्ञा पुं० थाला । दहलाना - क्रि० स० डर से कँपाना । दहलीज़ - संज्ञा खो० देहली । c दहशत - संज्ञा बी० डर । दहा - संज्ञा पुं० १. मुहर्रम का महीना । २. मुहर्रम की १ से १० तारीख़ तक का समय । ३. ताज़िया । दहाई -संज्ञा खो० १. दस का मान या भाव । २. अंकों के स्थानों की गिनती में दूसरा स्थान जिस पर जो अंक लिखा होता है, उससे उतने ही गुने दस का बोध होता है । दहाड़-संज्ञा खो० १. गरज । २. चिल्लाकर रोने की ध्वनि । दहाड़ना - क्रि० प्र० १. गरजना । २. चिल्लाकर रोना । दहाना - संज्ञा पुं० मुहाना | दहिना - वि० [स्त्री० दहिनी ] शरीर के दो पाश्र्वों में से उस पार्श्व का नाम जिधर के अंगों या पेशियों में अधिक बल होता है । बायाँ का उलटा । दहिने - क्रि० वि० दहिनी ओर की । दही -संज्ञा पुं० खटाई के द्वारा जमाया हुश्रा दूध । इहु- अव्य० १. श्रथवा । २. कदा- चित् । ३६० दांपत्य दहेड़ी-संज्ञा स्त्री० दही रखने का मिट्टी का बरतन । दहेज- संज्ञा पुं० वह धन और सामान जो विवाह के समय कन्या पक्ष की ओर से वर पक्ष को दिया जाता है । दहेला - वि० [स्त्री० दहेला ] १. दग्ध । २. दुःखी । वि० [स्त्री० दहेली ] भीगा हुआ । दाँ -संज्ञा पुं० दफा | संज्ञा पुं० जाननेवाला । दाँक- संज्ञा स्त्री० दहाड़ | दाँकना - क्रि० प्र० गरजना । दाँग-संज्ञा स्त्री० तौल । २. दिशा । - १. छः रत्ती की संज्ञा पुं० नगाड़ा । संज्ञा पुं० टीला | दाँज | संज्ञा स्त्री० बराबरी । दांत - संज्ञा पुं० १. दंत । दशन | २० दाँत के आकार की निकली हुई वस्तु । दांत - वि० १. दबाया हुआ । २. संयमी । ३. दाँत का । दाँता - संज्ञा पुं० दाँत के आकार का कँगूरा | दाँत किटकिट -संज्ञा स्त्री० १. कहा- सुनी । २. गाली-गलैाज | दांति संज्ञा बी० १. इंद्रिय निग्रह । २. विनय । - दांती -संज्ञा स्रो० हँसिया जिससे घास या फसल काटते हैं । संज्ञा खी० दाँतों की पंक्ति । दौना-क्रि० स० पक्की फसल के डंठलों को बैले से इसलिये दिवाना जिसमें डंठल से दाना अलग हो जाय । दांपत्य - नि० पति-पत्नी-संबंधी ।
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