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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३७६

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दिवालिया चुकाने के लिये कुछ न रह जाय । २. किसी पदार्थ का बिलकुल न रह जाना । ३६८ दीक्षा चीज़ पर रुपए देने वाले का कोई कुब्ज़ा न हो, उसे सिर्फ़ सूद मिलता रहे । दिष्टि - संज्ञा स्त्री० दे० "ष्टि" । दिसंतर-संज्ञा पुं० देशांतर | क्रि० वि० बहुत दूर तक । दिल-संज्ञा स्त्री० दे० "दिशा" । दिसना - क्रि० प्र० दे० " दिखना " | • दिघालिया - वि० जिसके पास ऋण चुकाने के लिये कुछ न बच गया हो । दिवाली -संज्ञा स्त्री० दे० " दीवाली" । दिवैया - वि० देनेवाला । दिव्य - वि० किक । ३. प्रकाशमान | दिव्यचक्षु-संज्ञा पुं० ज्ञानचक्षु | दिव्यता - सात्री ० १ दिव्य का भाव । २. सुंदरता । दिव्यदृष्टि-संज्ञा स्त्री० ज्ञानदृष्टि । दिव्यरथ - संज्ञा पुं० देवताओं का । १. स्वर्गीय । २. प्रा- दिसा - संज्ञा स्त्री० दे० "दिशा" । विमान । दिव्यांगना - संज्ञा स्त्री० १. देववधू । २. अप्सरा । दिव्या - संज्ञा स्त्री० तीन प्रकार की नायिकाओं में से एक 1. दिव्यादिव्य-संज्ञा पुं० तीन प्रकार के नायकों में से एक । दिव्यादिव्या - संज्ञा स्त्री० तीन प्रकार की नायिकाओं में से एक । दिव्यास्त्र -संज्ञा पुं० १. देवताओं का दिया हुआ हथियार । २. मंत्रों द्वारा चलानेवाला हथियार । दिव्योदक- संज्ञा पुं० वर्षा का जल । दिशू - संज्ञा स्त्री० दिशा । दिशा - संज्ञा स्त्री० तरफ । दिशाभ्रम-संज्ञा पुं० दिशाओं के संबंध में भ्रम होना । संज्ञा स्त्री० पैखाना | दिसावर - संज्ञा पुं० परदेस | दिसावरी - वि० बाहरी । दिसि - संज्ञा स्त्री० दे० "दिशा" । दिसिटि - संज्ञा स्त्री० दे० " दृष्टि" | दिसिदुरद + -संज्ञा पुं० दे० "दि ग्गज" । दिसिनायक -संज्ञा पुं० दे० " दिकपाल" । 1 दिलिप - संज्ञा पुं० दे० " दिकपाल" । दिसिराज -संज्ञा पुं० दे० "दिक- पाल" । दिसैया - वि० १, देखनेवाला । २. दिखानेवाला । दिस्टी:- संज्ञा स्त्री० दे० "दृष्टि" | दिस्टीबंध - संज्ञा पुं० नज़रबंद | जादू | दिस्ता - संज्ञा पुं० दे० " दस्ता” | दिहंदा - वि० दाता | दिहाड़ा- संज्ञा पुं० १. दुर्गंत । २. दिन । - दिहात संज्ञा स्त्री० दे० " देहात" । दीश्रा -संज्ञा पुं० दे० "दीया" । दीक्षक-संज्ञा पुं० दीक्षा देनेवाला गुरु । दिशाशूल - संज्ञा पुं० दे० "दिक्शूल " । दीक्षा -संज्ञा स्त्री० १. गुरु या श्राचाय्र्य दिशि-संज्ञा स्त्री० दे० "दिशा" । दिष्ट - संज्ञा पुं० भाग्य । दिष्टबंधक-संज्ञा पुं० वह रेहन जिसमें का नियमपूर्वक मंत्रोपदेश । २. उप- नयन - संस्कार जिसमें श्राचार्य गायत्री मंत्र का उपदेश देता है । ३. गुरुमंत्र ।