सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३८१

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

दुचिताई अस्थिरता । २. खटका |

दुचिताई | - संज्ञा स्त्री० १. चित्त की अस्थिरता । २. खटका । दुचिता - वि० [स्त्री० दुचिती ] १. जो दुबधे में हो । २. चिंतित । । दुज - संज्ञा पुं० दे० " द्विज" । दुजन्मा:- संज्ञा पुं० दे० "द्विजन्मा" । दुजपति: संज्ञा पुं० दे० " द्विजपति" । दुजीह-संज्ञा पुं० दे० "द्विजिह्न" । दुजेश-संज्ञा पुं० दे० " द्विजेश" । दुटूक - वि० दो टुकड़ों में किया हुआ । दुत् व्य० १. एक शब्द जो तिर- स्कारपूर्वक हटाने के समय बोला जाता है । 1 २. घृणा या तिरस्कार- सूचक शब्द | - दुतकार-संज्ञा स्त्री० फटकार । दुतकारना- क्रि० स० १. दुत दुत् शब्द करके किसी को अपने पास से हटाना । २ तिरस्कृत करना । . दुतर्फा - वि० [स्त्री० दुतकीं] दोनों श्रोर का । 1 दुतारा - संज्ञा पुं० एक बाजा जिसमें दो तार होते हैं । दुति-संज्ञा स्त्री० दे० "श्रुति" । दुतिमान - वि० दे० " द्युतिमान् " । दुतिय - वि० दे० "द्वितीय" । दुतिया - संज्ञा स्त्री० पक्ष की दूसरी तिथि । दुतिवंत - वि० १. आभायुक्त । २. सुंदर । दुतीय - वि० दे० " द्वितीय" । दुतीया - संज्ञा स्त्री० दे० "द्वितीया" । खुदल - संज्ञा पुं० १. दाल । २. एक पौधा जिसकी जड़ भैौषध के काम में भाती है । ३७३ दुधिया विष दुदलाना + - क्रि० स० दे० "दुत- कारना" । - दुदामी संज्ञा स्त्री० एक प्रकार का सूती कपड़ा जो मालवे में बनता था । संज्ञा श्री० खड़िया मिट्टी । दुधमुख - वि० दूधमुहाँ । दुधमुँहाँ - वि० दे० "दूधमुहाँ" । दुधहांड़ी -संज्ञा स्त्री० मिट्टी का वह छोटा बरतन जिसमें दूध रखा या गरम किया जाता है । । दुधांड़ी संज्ञा स्त्री० दे० "दुधइङ्गिी" । दुधार - वि० १. दूध देनेवाली । जिसमें दूध हो । २. वि० संज्ञा पुं० दे० "दुधारा" । दुधारा - वि० (तलवार, छुरी आदि) 'जिसमें दोनों ओर धार हो । संज्ञा पुं० एक प्रकार का खाँड़ा । दुधारी - वि० स्त्री० दूध देनेवाली । वि० [स्त्री० जिसमें दोनों श्रोर धार हो । दुधारू | - वि० दे० " दुधार" | दुधिया - वि० १. दूध मिला हुआ । २. जिसमें दूध होता हो । ३. दूध की तरह सफेद । संज्ञा स्त्री० १ दुद्धी नाम की वास । २. एक प्रकार की उवार या चरी । ३. खड़िया मिट्टी । दुधिया पत्थर - संज्ञा पुं० १. एक प्रकार का मुलायम सफेद पत्थर जिसके प्याले आदि बनते हैं । २. एक प्रकार का नग या रत । दुधिया विष-संज्ञा पुं० कलियारी की जाति का एक विष जिसके सुंदर पौधे काश्मीर और हिमालय के पश्चिमी भाग में मिलते हैं। इसकी जड़ में विष होता है ।