दुर्दिन दु दिन - संज्ञा पुं० १. बुरा दिन । २. ऐसा दिन जिसमें बादल छाए हों और पानी बरसता हो । दुर्देव - संज्ञा पुं० १. दुर्भाग्य । बुरी किस्मत । २. दिनों का बुरा फेर । दुर्द्धर - वि० १. जिसे कठिनता से पकड़ सकें । २. प्रबल | । दुर्द्धर्ष - वि० १. जिसका दमन करना कठिन हो । २. प्रबल । दुर्नाम - संज्ञा पुं० १. बदनामी । २. गाली । द नीति - संज्ञा खो० कुनीति | दुर्बल - वि० १. कमज़ोर । २. दुबला- द पतला । र्बलता - संज्ञा स्त्री० १. कमज़ोरी । दुबलापन । दुर्बोध - वि० गूढ़ | दुर्भाग्य-संज्ञा पुं० मंद भाग्य । दुर्भिक्ष-संज्ञा पुं० श्रकाल । दुर्भिच्छ-संज्ञा पुं० दे० "दुर्भित" । दुर्मति-संज्ञा खो० बुरी बुद्धि । वि० ० १. जिसकी समझ ठीक न हो । २. खल । ६ मुख -संज्ञा पुं० १. घोड़ा । २. राम- चंद्रजी का एक गुप्तचर जिसके द्वारा उन्होंने सीता के विषय में लोका- पवाद सुना था । वि० १. जिसका मुख बुरा हो । २. कटुभाषी । दुर्योधन-संज्ञा पुं० कुरुवंशीय राजा धृतराष्ट्र का ज्येष्ठ पुत्र जो अपने चचेरे भाई पांडवों से बहुत बुरा ३७६ दुलरी मानता था । कौरवों में श्रेष्ठ । दुर्रानी-मंज्ञा पुं० अफ़ग़ानों की एक जाति 1 दुलंय वि० जिसे जल्दी लाँघ न सक | - द लक्ष्य - वि० जो कठिनता से दिखाई पड़े । दुर्लभ - वि० १. जिसे पाना सहज न हो । २. अनोखा | दुर्वचन - संज्ञा पुं० गाली | द वह - वि० जिसका वहन करना कॅठिन हो । दुर्वाद-संज्ञा पुं० निंदा | दुर्वासा - संज्ञा पुं० एक मुनि । ये अत्यंत क्रोधी थे । द, वृत्त - वि० दुराचारी | दुर्व्यवस्था - संज्ञा स्त्री० कुप्रबंध | दुर्व्यवहार - संज्ञा पुं० बुरा व्यवहार | दुर्व्यसन - संज्ञा पुं० बुरी लत । द लकी - संज्ञा स्त्री० घोड़े की एक चाल जिसमें वह चारों पैर अलग अलग उठाकर कुछ उछलता हुआ चलता है । दुलखना- क्रि० स० बार बार कहना या बतलाना । दुलड़ी-संज्ञा खा० दो लड़ों की माला । दुलत्ती - संज्ञा बी० घोड़े आदि चौ- पायों का पिछले दोनों पैरों को उठाकर मारना । दुलराना + - क्रि० स० बच्चों को पहलाकर प्यार करना । क्रि० प्र० दुलारे बच्चों की सी चेष्टा करना । दुलरी-संज्ञा खी० दे० "दुलड़ो" ।
पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३८४
दिखावट