दुलहन दुलहन - संज्ञा स्त्री० नवविवाहिता वधू । द लहा - संज्ञा पुं० दे० " दूल्हा " । दुलहिया, दुलही | -संज्ञा स्त्री० दे० "दुलहन" । द लहेटा - संज्ञा पुं० दुलारा लड़का । द लाई -संज्ञा स्त्री० श्रोढ़ने का दोहरा कपड़ा जिसके भीतर रूई भरी हो । दुलाना :- क्रि० स० दे० "डुलाना" । दुलार - संज्ञा पुं० लाड़-प्यार | दुलारना - क्रि० स० लाड़ करना । द लारा - वि० [स्त्री० दुलारो ] जिसका बहुत दुबार या लाड़ प्यार हो । द व वि० दो । दुघन - संज्ञा पुं० १. खल । २. शत्रु । ३. राक्षस । वाज-संज्ञा पुं० एक प्रकार का घोड़ा । द्वादस - वि० दे० " द्वादश" । द्वादस बानी - वि० खरा । दधार - संज्ञा पुं० दे० "द्वार" । दुवाल -संज्ञा स्त्री० रिकाब में लगा हुआ चमड़े का चौड़ा फीता । दुबिधा | संता स्त्री० दे० " दुबधा" । द वो + - वि० दोनों । दुशवार - वि० [संज्ञा दुशवारो] कठिन । द शाला - संज्ञा पुं० पशमीने की चादरों का जोड़ा जिनके किनारे पर पश- मीने की बेलें बनी रहती हैं । दुशासन - संज्ञा पुं० दे० "दुःशा- सन" । "दुःशा- दुश्वारत-वि० बुरे आचरण का । संज्ञा पुं० बुरा आचरण । ३७७ बुरे चरित्रवाला | संज्ञा पुं० बुरी चाल । दुसही द श्चेष्टा-संज्ञा स्त्री० [वि० दुश्चेष्टित ] बुरा काम । दुश्मन - संज्ञा पुं० शत्रु । दुश्मनी -संज्ञा स्त्री० वैर । द ष्कर - वि० दुःसाध्य । द कर्म-संज्ञा पुं० [वि० दुष्कर्म्मा ] बुरा काम । दुष्कर्मा - वि० पापी | दं कर्मी - वि० बुरा काम करनेवाला । काल - संज्ञा पुं० १. बुरा वक्त । दुभित । 2. दुष्ट - वि० [स्त्री० दुष्टा] १. जिसमें दोष या ऐब हो । २. दुर्जन । दुष्टता - संज्ञा स्त्री० १. दोष । २. बहु- माशी । दुष्टपना -संज्ञा पुं० दे० "दुष्टता" । दष्टाचार - संज्ञा पुं० कुचाल | दुष्टात्मा - वि० खेटी प्रकृति का । द ष्प्राप्य - वि० जो सहज में न मिल सके । दुष्यंत - संज्ञा पुं० पुरुवंशी एक राजा जो ऐति नामक राजा के पुत्र थे । इन्होंने कण्व मुनि के आश्रम में शकुंतला के साथ गांधर्व विवाह किया था । दुसराना -क्रि० स० दे० " दोह- राना" । दुसारहा + - वि० साथी । द सह - वि० जो सहा न जाय । दुश्चरित्र - वि० [ श्री० दुश्चरित्रा ]. दुसही । - वि० जो कठिनता से सह सके ।
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