सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३८६

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

दुसाध दुसाध - संज्ञा पुं० हिंदुओं में एक नीच जाति जो सूअर पालती है । दुसार -संज्ञा पुं० आर पार किया हुआ छेद । क्रि० वि० एक पार से दूसरे पार तक । द साल-संज्ञा पुं० आर-पार छेद | द सूती - संज्ञा श्री० एक प्रकार की मोटी चादर । दुसेजा - संज्ञा पुं० पलंग | दुस्तर - वि० १. जिसे पार करना कठिन हो । २. विकट । दुस्सह - वि० दे० " दुःसह " । दु हत्था - वि० [स्त्री० दुहत्थी ] दोनेां हाथों से किया हुश्रा । दुहना- कि० स० १. स्तन से दूध निचोड़कर निकालना । २. बिचा- हुना । द हनी-संघ स्त्री० वह बरतन जिसमें दूध दुहा जाता है । दुहाई -संज्ञा खो० १. घोषणा | शपथ । संज्ञा स्त्री० १. गाय, ३७८ दूरत्व दूज - संज्ञा स्त्री० द्वितीया । दूजा - वि० दूसरा । दूत-संज्ञा पुं० [स्त्री० दूती ] चर । दूतकर्म संज्ञा पुं० दूत का काम । दूतिका, दूती - संज्ञा स्त्री० कुटनी । दूती-संज्ञा । दूध - संज्ञा पुं० पय । दुग्ध । दूध पिलाई - संज्ञा बी० १. १. दूध पि- लानेवाली दाई । २. ब्योह की एक रसम जिसमें बरात के समय माता, वर को दूध पिलाने की सी मुद्रा करती है। दूध-पूत- -संज्ञा पुं० धन और संतति । दूधमहा - वि० छोटा बच्चा । दूधमुख - वि० छोटा बच्चा । दूधिया - वि० १. जिसमें दूध मिला हो अथवा जो दूध से बना हो । २. सफेद । संज्ञा पुं० १. एक प्रकार का सफेद और चमकीला पत्थर या रत्न । २. एक प्रकार का सफेद घटिया मुला- यम पत्थर जिसकी प्यालियाँ आदि बनती हैं । २. भैंस आदि को दूत दुहने का काम | २. दुहने की मज़दूरी । दुहावनी -संज्ञा स्त्री० दुहाई । दुहिता - संज्ञा स्त्री० कन्या । हिन - संज्ञा पुं० ब्रह्मा । दुहेला - वि० स्त्री० [दुहेली] कठिन । संज्ञा पुं० विकट या दुःखदायक कार्य दूइज - संज्ञा खी० दे० "दूज" | दूकान - संज्ञा पुं० दे० " दुकान" । दूखना +- क्रि० स० ऐव लगाना । । दून-संज्ञा स्त्री० दूने का भाव । दूतावास - संज्ञा पुं० दूसरे राज्य के के रहने का स्थान । दूना - वि० दुगुना । दून- वि० दे० "दोनां" । दूब-संज्ञा स्त्री० एक बहुत प्रसिद्ध घास । दूबे - संज्ञा पुं० द्विवेदी ब्राह्मण । दूभर - वि० कठिन । दूमना +- क्रि० भ० हिलना । दूरंदेश - वि० [संज्ञा दूरंदेशा ] दूरदर्शी । दूर-क्रि० वि० बहुत फासले पर । वि० जो दूर या फासले पर हो । दूरत्व-संज्ञा पुं० दूरी ।