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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३८८

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दृष्टिगोचर दृष्टिगोचर - वि० जो देखने में श्रा सके । दृष्टिपथ - संज्ञा पुं० दृष्टि का फैलाव । दृष्टिपात -संज्ञा पुं० ताकना । दृष्टिबंध संज्ञा पुं० १. जादू । २. हाथ की सफाई या दृष्टिवंत - वि० १ चालाकी । दृष्टिवाला । २. ज्ञानी । दृष्टिवाद-संज्ञा पुं० वह सिद्धांत जिसमें दृष्टि या प्रत्यक्ष प्रमाण ही की प्रधा- नता हो । २. स्त्रियों दे-संज्ञा स्त्री० स्त्रियों के लिये एक आदर- सूचक शब्द | देई -संज्ञा स्त्री० १. देवी । के लिये एक आदरसूचक शब्द । देख - संज्ञा स्त्री० देखने की किया या भाव । देखन -संज्ञा स्त्री० देखने की क्रिया, भाव या ढंग । देखनहारा - संज्ञा पुं० [स्त्री० देखन- हारो ] देखनेवाला | देखना- क्रि० स० १. किसी वस्तु के अस्तित्व या उसके रूप, रंग श्रादि का ज्ञान नेत्रों द्वारा प्राप्त करना । २. जाँच करना । ३. परीक्षा करना ४. निगरानी रखना । देख-भाल - संज्ञा खो० १. जांच-पड़- ताल | २. देखा-देखी । देखरावना | - क्रि० स० दे० "दिख लाना" । देख-रेख - संज्ञा खो० निगरानी । देखाऊ - वि० १. जो केवल देखने में सुदर हो, काम का न हो । २. बनावटी । देखा देखी -संज्ञा स्त्री० साक्षात्कार । क्रि० वि० दूसरों को करते देखकर । ३८० देवगिरि देखाना + - क्रि० स० दे० " दिखाना" | देखाव - संधा पुं० १. दृष्टि की सीमा । २. ठाट-बाट । देखावट - संज्ञा स्त्री० १. बनाव । २. ठाट-बाट । देग - संज्ञा पुं० खाना पकाने का चौड़े मुँह और चौड़े पेट का बड़ा बरतन । देगचा - संज्ञा पुं० [स्त्री० पा० देगची ] छोटा देगा | देदीप्यमान- वि० चमकता हुआ । देन - संज्ञा स्त्री० १. देने की क्रिया या भाव । २. दी हुई चीज़ । देनदार - संज्ञा पुं० श्रऋणी । देनहारा । - वि० देनेवाला । देना - क्रि० स० अपने अधिकार से दूसरे के अधिकार में करना । संज्ञा पुं० कुज़ | देय - वि० देने योग्य । देर-संज्ञा खो० १. विलंब । २. समय । देरी | - संज्ञा खो० दे० " देर" । देव-संज्ञा पुं० [ खो० देवा ] १. देवता । २. ब्राह्मणों तथा बड़ों के लिये एक आदर सूचक शब्द । संज्ञा पुं० दैत्य | देवऋण-संज्ञा पुं० देवताओं के लिये कर्त्तव्य, यज्ञादि । देवऋषि-संज्ञा पुं० देवताओं के लोक में रहनेवाले नारद, अत्रि, मरीचि, भरद्वाज, पुलस्त्य श्रादि ऋषि । देवकन्या - संज्ञा स्त्री० देवता की पुत्री । देवकी - सज्ञा स्त्री० वसुदेव की स्त्री और श्रीकृष्ण की माता का नाम । देवकीनंदन - संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । देवगरण - संज्ञा पुं० देवताओं का वर्ग । देवगति संज्ञा खी० स्वर्गलाभ | देवगिरि - संज्ञा पुं० १. रैवतक पर्वत -