दोनिया दोनिया, दोनी | -संज्ञा स्त्री० छोटा दोना । दोना - वि० एक और दूसरा । उभय । दोपलिया | - वि० संज्ञा स्त्री० दे० "दोपल्ली" । I दोपल्ली - वि० जिसमें दो पल्ले हैं। । दोपहर - संज्ञा स्त्री० वह समय जब कि सूर्य मध्य श्राकाश में रहता है । दोपहरिया । - संज्ञा स्त्री० दे० " दोपहर दोफसली - वि० १. दोनों फसलों के संबंध का । २. जो दोनों २. जो दोनों ओर लग सके । ३८४ "| दोबारा - क्रि० वि० दूसरी बार | दोभाषिया - संज्ञा पुं० दे० "दुभाषिया "। दोमंज़िला - वि० जिसमें दो खंड या मंज़िले हो । दोमहला - वि० दे० " दोमंज़िला " । दो मुहा - वि० १. जिसे दो मुँह हों । २. कपटी । दोमुंहा सांप-संज्ञा पुं० १. एक प्रकार का साप जिसकी दुम मोटी होने के कारण मुँह के समान ही जान पड़ती है 1 २. कुटिल । दोरंगा - वि० १. दो रंग का । जो दोनों श्रोर लग या चल सके । दोरंगी - संज्ञा स्त्री० १. दोरंगे या दो- मुहे होने का भाव । २. कपट । दोरदंड - वि० दे० "दुर्दड " । दोरसा - वि० दो प्रकार के स्वाद या रसवाला । २. संज्ञा पुं० एक प्रकार का पीने का तमाकू । दोराहा - संज्ञा पुं० वह स्थान जहाँ से आगे की ओर दो मार्ग जाते हैं। । दोरुखा - वि० १. जिसके दोनों ओर दोहता समान रंग या बेल-बूटे हैं। । २. जिसके एक ओर एक रंग और दूसरी ओर दूसरा रंग हो । दोल-संज्ञा पु० १. मूला । २. डोली । दोला -संज्ञा श्री० १. हिंडोला । २. डोली या चंडोल । दोलायंत्र - संज्ञा पुं० वैद्यों का एक यंत्र जिसकी सहायता से वे श्रोष- धियों के अर्क उतारते हैं । दोलायमान- वि० हिलता हुधा । दोशाखा - संज्ञा पुं० शमादान या दीवारगीर जिसमें दो बत्तियां हों । दोष- संज्ञा पुं० १. बुरापन । २. कलंक । ३. अपराध । २. संज्ञा पुं० शत्रुता । दोषनी-संज्ञा पुं० दोष | दोषनाश +- क्रि० स० दोष लगाना । दोषिन | -संज्ञा स्त्री० १. अपराधिनी । २. पाप करनेवाली स्त्री । दोषी - संज्ञा पुं० १. अपराधी । पापी । दोस* +-संज्ञा पुं० दे० "दोष" । दोसदारी-संज्ञा स्त्री० मित्रता । दोसाला / - वि० दो वर्ष का । दोस्ती - सज्ञा स्त्री० दोतही या दुसूती नाम की बिछाने की मोटी चादर । दोस्त - संज्ञा पुं० मित्र । दोस्ताना -संज्ञा पुं० १. दोस्ती । २. मित्रता का व्यवहार । वि० दोस्ती का | दोस्ती - संज्ञा स्त्री० मित्रता । दोही -संज्ञा पुं० दे० "द्रोह" । दोहगा | -संज्ञा स्त्री० रखनी । दोहता-संज्ञा पुं० [स्त्री० दोहती ] नाती ।
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