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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३९५

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द्रोणाचार्य लिखा है । द्रोणाचार्य-संज्ञा पुं० महाभारत में प्रसिद्ध ब्राह्मण वीर जो भरद्वाज ऋषि के पुत्र थे द्रोणी - संज्ञा बी० १. डोंगी । २. छोटा दोना। ३. कठवत । द्रोन -संज्ञा पुं० दे० " द्रोण" । द्रोह -संज्ञा पुं० [स्त्री० द्रोही ] वैर, द्वेष | द्रोही - वि० [ खो० द्रोहिणी] द्रोह करने- वाला । द्रौपदी संज्ञा स्त्री० राजा द्रुपद की कन्या कृष्णा जो पाँचों ब्याही गई थी । पांडवों को २. दो द्वंद - संज्ञा पुं० १. जोड़ा । आदमियों की परस्पर लड़ाई । ३. झगड़ा । संज्ञा स्त्री० दुरंदुभी । द्वंद्व-संज्ञा पुं० १. जोड़ा । २. रहस्य । -- ३. झगड़ा । ४. एक प्रकार का समास जिसमें मिलनेवाले सब पद प्रधान रहते हैं और उनका अन्वय एक ही क्रिया के साथ होता है । द्वंद्वयुद्ध - संज्ञा पुं० कुश्ती । द्वय वि० दो । द्वादश- वि० बारह । द्वादशाह - संज्ञा पुं० १. बारह दिनों का समुदाय । २. वह श्राद्ध जो किसी के निमित्त उसके मरने से बारहवें दिन हो । द्वादशी-संज्ञा स्त्री० किसी पक्ष की बारहवीं तिथि । द्वापर - संज्ञा तीसरा युग । पुं० चार युगों में से द्वार - संज्ञा पुं० १. मुहड़ा । २. दर- वाज्रा । ३. उपाय । द्वारका - संज्ञा खो० काठियावाड़-गुज- काठियावाड़-गुज- ३८७ द्विजराज रात की एक प्राचीन नगरी । द्वारकाधीश संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । द्वारकानाथ - संज्ञा पुं० दे० " द्वारका- धीश" । द्वारपाल-संज्ञा पुं० दरबान । द्वारपूजा - संज्ञा स्त्री० विवाह में एक कृत्य जो कन्यावाले के द्वार पर उस समय होता है जब बारात के साथ वर आता है । द्वारवती - संज्ञा स्त्री० द्वारका । द्वारा - संज्ञा पुं० १. दरवाज्रा । मार्ग | अव्य० ज़रिए से । द्वारावती-संज्ञा स्त्री० द्वारका । द्वारी - संज्ञा बी० छोटा द्वार | द्वि-वि० दो । द्विक - वि० १. जिसमें दो अवयब हों । २. दोहरा । द्विकर्मक- वि० जिसके दो कर्म हो । द्विग-संज्ञा पुं० वह कर्मधारय समास जिसका पूर्वपद संख्यावाचक हो । द्विगण - वि० दुगना । द्विगुणित - वि० १. दो से गुणा किया हुआ । २. दूना । द्विज-संज्ञा पुं० जिसका जन्म दो बार हुआ हो । संज्ञा पुं० १. अंडज प्राणी । २. पक्षी । ३. ब्राह्मण, पत्रिय और वैश्य वर्ण के पुरुष जिनको यज्ञोपवीत धारण करने का अधिकार है । ४. ब्राह्मण । द्विजन्मा - वि० जिसका दो बार जन्म हुआ हो । संज्ञा पुं० द्विज । द्विजपति, द्विजराज -संज्ञा पुं० ब्राह्मख । |