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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/३९६

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द्विजाति द्विजाति-संज्ञा पुं० १. द्विज । २. ब्राह्मण । द्विजिह्न - वि० १. जिसे दो जीभ हों । १. चुगलखोर । संज्ञा पु० सौंप | द्विजेंद्र, द्विजेश-संज्ञा पुं० दे० "द्विन- पति" । द्वितीय - वि० [स्त्री० द्वितीया ] दूसरा । द्वितीया - संज्ञा बी० दूज । द्वित्व-संज्ञा पुं० दो का भाव । द्विदल - वि० १. जिसमें दो दल या पिंड हो । २. जिसमें दो पटल हो । रुज्ञा पुं० वह न जिसमें दो दल हो । द्विपदी - संज्ञा स्त्री० १. वह छंद या वृत्ति जिसमें दो पद हो । २. २. दे पदों का गीत | द्विपाद - वि० १. दो पैरोंवाला (पशु) । २. जिसमें दो पद या चरण हों । द्विमुखी - वि० स्त्री० दो मुँहवाली । द्विरद-संज्ञा पुं० हाथी । वि० दो दतित्वाला । द्विरागमन - संज्ञा पुं० वधू का अपने पति के घर दूसरी बार थाना । द्विरेफ-संज्ञा पु० भ्रमर । द्विविध - वि० दो प्रकार का । क्रि० वि० दो प्रकार से । द्विवेदी - संज्ञा पुं० दूबे । ३८८ द्वीप-संज्ञा पुं० स्थल का वह भाग जो चारों भोर जल से घिरा हो । टापू । द्वेष-सज्ञा पुं० चिढ़ । शत्रता । द्वेषी - वि० [ खी० द्वेषिणी ] विरोधी । वैरी । द्वेष्टा- वि० दे० "द्वेषी" । द्वै । - वि० दो । द्वैत -संज्ञा पुं० १. दो का भाव । २. भेद । द्वैतवाद - संज्ञा पुं० वह दार्शनिक सिद्धांत जिसमें श्रात्मा और पर- मात्मा श्रर्थात् जीव और ईश्वर दो भिन्न पदार्थ मानकर विचार किया जाता है। द्वतवादी - वि० [स्त्री० इतवादिनी ] द्वैतवाद को माननेवाला । द्वैध - सज्ञा पुं० १. विरोध । २. श्राधु- निक राजनीति में वह शासन-प्रणाली जिसमें कुछ विभाग सरकार के हाथ में और कुछ प्रजा के प्रतिनिधियों के हाथ में हों । द्वैपायन-संज्ञा पुं० ब्यासजी का एक नाम । द्वैमातुर - वि० जिसकी दो माँ हो । संज्ञा पुं० १. गणेश । २. जरासंध । द्वौ - वि० दोनेों । वि० दे० " दव" ।