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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/४०५

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बुध धुत्रयँध - वि० धुएँ की तरह मह- कनेवाला | संज्ञा स्त्री० अन्न न पचने के कारण आनेवाली डकार । धुकधुकी - संज्ञा स्त्री० १. छाता के बीच का वह कुछ गहरा सा होता है पेट और भाग जो । २. कलेजा । ' ३. कलेजे की धड़कन । ४ डर । धुकनाः +- क्रि० प्र० १. झुकना । २. गिर पड़ना । ३. झपटना । धुकाना+:-क्रि० स० १. झुकाना । २. गिराना । ३. पछाड़ना । क्रि० स० धूनी देना । धुकार, धुकारी-संज्ञा स्त्री० नगाड़े का शब्द । धुज, धुजा-संज्ञा स्त्री० दे० "ध्वजा" । ३६७ घुड़गा - वि० जिसके शरीर पर कोई वस्त्र न हो, केवल धूल हो । धुधुकार - संज्ञा स्त्री० १. धू धू शब्द का शोर । २. गरज | धुधुकारी-संज्ञा स्त्री० दे० "धुधुकार" । धुन - सज्ञा स्त्री० १. लगन । २. मैौज । ३. सोच । संज्ञा स्त्री० १. गीत गाने का ढंग । २. दे० "ध्वनि" । धुनकना- क्रि० स० दे० " धुनना" । धुनकी संज्ञा स्त्री० १. फटका । छोटा धनुष । २. धुनना- क्रि० स० १. धुनकी से रूई साफ़ करना । २. घुमाना, चक्कर देना । धुनि - संज्ञा स्त्री० दे० "ध्वनि" । धुनियाँ - संज्ञा पुं० वह जो रूई धुनने का काम करता हो । घुरंधर - वि० श्रेष्ठ । धून मा धुर-संज्ञा पुं० १. गाड़ी या रथ आदि का धुरा । २. बिस्वांसी । अव्य० १. बिलकुल ठीक । २. एक- दम दूर । वि० पक्का | घुरजटी-संज्ञा पुं० दे० "धूर्जटी" । धुरना - क्रि० स० पीटना । + धुरपद - संज्ञा पुं० दे० "ध्रुपद" । धुरा - संज्ञा पुं० [संज्ञा स्त्री० अल्पा० धुरी] वह डंडा जिसमें पहिया पहनाया रहता है और जिस पर वह घूमता है धुरीण - वि० १. बोझ सँभालनेवाला । २. मुख्य । ३. धुरंधर । धुरेटना + - क्रि० स० धूल से लपेटना । धुर्रा-संज्ञा पुं० कण | I धुलना- क्रि० प्र० पानी की सहायता से साफ़ या स्वच्छ किया जाना । धुलाई - संज्ञा स्त्री० १. धोने का काम या भाव । २. धोने की मज़दूरी । धुलाना- क्रि० स० धुलवाना । धुवाँस - संज्ञा स्त्री० उरद का आटा जिससे पापड़ या कचौड़ी बनती है । धुस्सा - संज्ञा पुं० मोटे ऊन की लोई जो श्रोढ़ने के काम में जाती है । धू संज्ञा पुं० दे० " धुआँ ” । धूजट - संज्ञा पुं० शिव । धूत - वि० १. थरथराता हुआ । २. जो धमकाया गया हो । ३. व्यक्त । + वि० धूत | धूतना- क्रि० स० धूर्तता करना । धूधू-संज्ञा पुं० भाग के दहकने या जोर से जलने का शब्द । धूनना- क्रि० स० धूनी देना । क्रि० स० दे० " धुनना" ।