ध्वन्य ध्वन्य-संज्ञा पुं० व्यंग्यार्थ । ध्वन्यात्मक - वि० १. ध्वनि-स्वरूप या २. ( काव्य ) जिसमें निमय । व्यंग्य प्रधान हो । ध्वन्यार्थ -संज्ञा पुं० वह अर्थ जिसका बोध वाच्यार्थ से न होकर केवल ४०१ - ध्वनि या व्यंजना से हो । ध्वस्त - वि० १. गिरा पड़ा । टूटा-फूटा । ध्वांत-संज्ञा पुं० अंधकार । ध्वांतचर - संज्ञा पुं० राक्षस । नंदा २. न - एक व्यंजन जो हिंदी या संस्कृत वर्णमाला का बीसवाँ और तवर्ग का पाँचवाँ वर्ण है । इसका उच्चारण- स्थान दंत है 1 नंग-संज्ञा पुं० नंगापन । नंग-धड़ंग - वि० बिलकुल नंगा | नंग- मुनंगा - वि० दे० "नंग धड़ंग” । नंगा - वि० १. जो कोई कपड़ा न पहने । २. निर्लज्ज । ३. खुला हुआ । नंगा - भोली - संज्ञा स्त्री० तलाशी । नंगा बुच्चा, नंगाबूचा - वि० कपड़ों की जिसके पास कुछ भी न हो । नंगालुच्चा - वि० बदमाश । नॅगियाना- क्रि० स० १. नंगा करना । २. सब कुछ छीन लेना । नंद-संज्ञा पुं० १. आनंद । २. लड़का । ३. गोकुल के गोपों के मुखिया जिनके यहाँ श्रीकृष्ण को, उनके जन्म के समय, वसुदेव जाकर रख आए थे । नंदक - संज्ञा पुं० १. श्रीकृष्ण का खङ्ग । २. राजा नंद जिनके यहाँ कृष्ण बाल्यावस्था में रहते थे । वि० १. आनंददायक । २. कुल- २६ न पालक । - 1 नंदकिशोर - संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । नंदकी संज्ञा स्त्री० विष्णु । नंदकुमार - संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । नंदगांव -संज्ञा पुं० वृंदावन का एक गाँव जहाँ नंद गोप रहते थे । नंदग्राम - संज्ञा पुं० १. नंदीग्राम । २. नंदिग्राम, जहाँ भरत ने राम के वनवास काल में तपस्या की थी । नंदनंदन - संज्ञा पुं० श्रीकृष्ण । नंदनंदिनी - संज्ञा स्त्री० योगमाया । नंदन-संज्ञा पुं० १. इंद्र के उपवन का नाम जो स्वर्ग में माना जाता 1 २. लड़का । वि० श्रानंददायक | नंदन घन - संज्ञा पुं० इंद्र की वाटिका । नंदनाः- क्रि० भ० श्रानंदित होना । संज्ञा स्त्री० लड़की नंदनी -संज्ञा स्त्री० दे० "नंदिनी" । नंदरानी -संज्ञा स्त्री० नंद की जी, यशोदा | नंदलाल -संज्ञा पुं० नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण । नंदा - संज्ञा जी० १. दुर्गां । २. ननद ।
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