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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/४१३

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नचाहाँ नचाहाँ छ | - वि० जो सदा नाचता या इधर-उधर घूमता रहे। नज़दीक - वि० [ संज्ञा, वि० नख की ] निकट । नज़म-संज्ञा स्त्री० कविता | नज़र-संज्ञा खी० १. दृष्टि । २. कृश - दृष्टि । ३. निगरानी । ४. दृष्टि का वह कल्पित प्रभाव जो किसी सुंदर मनुष्य या अच्छे पदार्थ आदि पर पढ़कर उसे ख़राब कर देनेवाला माना जाता है । संज्ञा खो० १. भेंट । २. अधीनता सूचित करने की एक रस्म जिसमें लोग नकद रुपया आदि हथेली में रखकर सामने लाते हैं । नज़रना- क्रि० प्र० १. देखना । २. नज़र लगाना । नज़रबंद - वि० जो किसी ऐसे स्थान पर कड़ी निगरानी में रखा जाय जहाँ से कहीं श्रा जा न सके । नज़रबाग़- संज्ञा पुं० महला या बड़े बड़े मकानों श्रादि के सामने या चारों ओर का बाग़ । नज़राना- क्रि० प्र० नज़र लग जाना । क्रि० स० नज़र लगाना । संज्ञा पुं० भेंट | नज़ला-संज्ञा पुं० जुकाम | नज़ाकत - संज्ञा स्त्रो० नाजुक होने का भाव । नजात - संज्ञा स्त्री० मुक्ति । नज़ारा -संज्ञा पुं० दृश्य । नजिकाना - क्रि० स० निकट पहुँ- चना । नजीक क्रि० वि० निकट । न जूम - संज्ञा पुं० ज्योतिष विद्या । नजूमी - संज्ञा पुं० ज्योतिषी । ૦૪ नतैय नट - संज्ञा पुं० १. नाटक खेलनेवाले पात्र । २. एक नीच जाति जो प्रायः गा-बजाकर और खेल-तमाशे करके निर्वाह करती है । नटई | - संज्ञा स्त्री० १. गला । २. गले की घंटी । नटखट - वि० १. चालाक । ऊधमी । २. नटना- क्रि० प्र० १. नाचना । २. सुकरना । नटनि+ - संज्ञा खो० नृत्य | सशा बो० इनकार | नटनी -संज्ञा स्त्रो० १. नट की स्त्री । २. नट जाति की खो । नटवर - संज्ञा पुं० १. नाट्यकला में प्रवीण मनुष्य । २. श्रीकृष्ण । वि० चालाक । नटसार-संज्ञा स्त्री० दे० "नाव्य- शाळा" । नटसाल - संज्ञा स्त्री० १, काँटे का वह भाग जो निकाल लिए जाने पर भी टूटकर शरीर के भीतर रह जाता है । ९. कसक । नटिन-संज्ञा खो० नट की स्त्री । नटी -संज्ञा स्त्री० १. नट जाति की स्त्री । २. नर्तकी । नटुश्रा, नटुवा ! -संज्ञा पुं० १. दे० "नट" । २. "नटई" । नतर, नत ६+ - क्रि० वि० नहीं तो । नति-संज्ञा स्त्री० १. झुकाव । नमस्कार । ३. नम्रता । २. नतिनी + - संज्ञा स्त्री० लड़की की लड़की । नतीजा संज्ञा पुं० परिणाम | नतु क्रि० वि० नहीं तो । - नतैत । संज्ञा पुं० संबंधी ।