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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/४१५

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नमस्कार जो फुक सके । नमस्कार - संज्ञा पुं० प्रणाम | नमस्ते - एक वाक्य जिसका अर्थ है- आपको नमस्कार है । नमाज़ -संज्ञा स्त्री० मुसलमानों की ईश्वर - प्रार्थना जो नित्य पांच बार होती है । नमाज़ी - संज्ञा पुं० १. नमाज़ पढ़ने- वाला । २. वह वस्त्र जिस पर खड़े होकर नमाज़ पढ़ी जाती है । नमाना +- क्रि० स० झुकाना । नमित- वि० झुका हुआ । नमी-संज्ञा स्त्री० गीलापन । नमूना - संज्ञा पुं० १. बानगी । ढाँचा | नम्र वि० विनीत । २. नय - संज्ञा पुं० १. नीति । २. नम्रता ।

  • संज्ञा स्त्री० नदी ।

नयकारी - संज्ञा पुं० १. नाचनेवाले का मुखिया । २. नाचनेवाला । नयन -संज्ञा पुं० नेत्र | नयनगोचर - वि० समक्ष | नयनपट - संज्ञा पुं० श्राँख की पलक । नयना +- क्रि० श्र० १. नम्र होना । २. झुकना । संज्ञा पुं० आँख | नयनी - संज्ञा स्त्री० आँख की पुतली । वि० स्त्री० श्रखवाली । नयनू - संज्ञा पुं० मक्खन | नयर :- संज्ञा पुं० नगर । २०७ नरलोक नरकंत - संज्ञा पुं० राजा । नरक - संज्ञा पुं० १. दोज़ख । जहन्नुम । २. बहुत ही गंदा स्थान । नरकगामी - वि० नरक में जानेवाला । नरक चतुर्दशी - संज्ञा स्त्री० कार्तिक कृष्णा चतुर्दशी जिस दिन घर का कूड़ा-कतवार निकालकर फेंका जाता है । नरकट-मंज्ञा पुं० बेंत की तरह का एक प्रसिद्ध पौधा । इसके डंठल कुल में, निगालियाँ, दौरियाँ तथा चटाइयाँ श्रादि बनाने के काम में आते हैं। नरकेसरी - संज्ञा पुं० नृसिंह | नरकेहरि - संज्ञा पुं० दे० " नरकेसरी" | नरगिस - संज्ञा स्त्री० प्याज़ की तरह का एक पौधा जिसमें कटोरी के आकार का सफेद रंग का फूल लगता है । नरत्व - संज्ञा पुं० नर होने का भाव । नरदेव - संज्ञा पुं० १. राजा । २. ब्राह्मण । नरनाथ - संज्ञा पुं० राजा । नरनाह - संज्ञा पुं० राजा । नरपिशाच- संज्ञा पुं० जो मनुष्य होकर भी पिशाचों का सा काम करे । नरभक्षी - संज्ञा पुं० राक्षस । नरमा- संज्ञा स्त्री० एक प्रकार की कपास । नरमाई +- संज्ञा स्त्री० दे० "नश्मी" । नरमाना- क्रि० स० नरम करना । क्रि० अ० नरम होना । नरमी - संज्ञा स्त्री० कोमलता । नयशील - वि० १. नीतिज्ञ । २. विनीत | नया - वि० नवीन । हाल का । नयापन - संज्ञा पुं० नवीनता । नर-संज्ञा पुं० पुरुष । मांस की आहुति दी जाती नरमेध - संज्ञा पुं० एक प्रकार का यज्ञ जिसमें प्राचीन काल में मनुष्य के बि० जो (प्राणी) पुरुष जाति का हो। नर लेकि- संज्ञा पुं० संसार । थी ।