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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/४२०

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नागरिकता नागरिकता - संज्ञा स्त्री० नागरिक के अधिकारों से संपन होने की अवस्था । नागरी - संज्ञा स्त्री० १. नगर की रहने- वाली स्त्री । २. चतुर खो । ३. भारतवर्ष की वह प्रधान लिपि जिसमें संस्कृत और हिंदी लिखी जाती है । देवनागरी । नागलोक - संज्ञा पुं० पाताल | नागवल्ली -संज्ञा खो० पान | नागवार - वि० अप्रिय । 1 १. असह्य । २. नागा - संज्ञा पुं० उस संप्रदाय का शैव साधु जिसमें लोग नंगे रहते हैं । संज्ञा पुं० १. श्रासाम के पूर्व की पहा ड़ियों में बसनेवाली एक जंगली जाति । २. श्रासाम में वह पहाड़ जिसके आस-पास नागा जाति की बस्ती है । संज्ञा पुं० बीच । २. नागिन - संज्ञा स्त्री० नाग की स्त्री । नागेंद्र - संज्ञा पुं० १. बड़ा सर्प । ऐरावत । नागेसर:- संज्ञा पुं० दे० "नागकेसर " | नागौर - संज्ञा पुं० मारवाड़ के अंतर्गत एक नगर । नाच - संज्ञा पुं० अंगों की वह गति जो - हृदयोल्लास के कारण मनमानी अथवा संगीत के मेल में ताल - स्वर के अनु. सार और हाव-भाव - युक्त हो । नाच - कूद - संज्ञा स्त्री० नाच - तमाशा । नाचघर - संज्ञा पुं० नृत्यशाला | नाचना- क्रि० भ० १. चित्त की उमंग से उछलना, कूदना तथा इसी प्रकार की और चेष्टा करना । २. नृत्य करना । ३. उद्योग में इधर से उधर फिरना । ४१२ नाड़ी नाच - महल - संज्ञा पुं० दे० "नाचवर" नाच रंग - संज्ञा पुं० श्रामोद-प्रमोद | नाचीज़ - वि० तुच्छ । नाज-संज्ञा पुं० धन । नाज़ - संज्ञा पुं० १. नखरा । २. घमंड | नाजिर - संज्ञा पुं० निरीक्षक । नाजुक - वि० कोमल । -1 नाटक - संज्ञा पुं० १. नट । २. अभि- नय । ३. अभिनय-ग्रंथ | नाटकशाला -संज्ञा खो० वह घर या स्थान जहाँ नाटक होता हो । नाटकिया, नाटकी - वि० नाटक का अभिनय करनेवाला | नाटकीय - वि० नाटक-संबंधी । नाटना- क्रि० प्र० निकल जाना । क्रि० स० अस्वीकार करना । नाटा - वि० का । [ त्रो० नाटी ] छोटे कुर नाट्य - संज्ञा पुं० १. नटों का काम । २. अभिनय । नाट्य मंदिर - संज्ञा पुं० नाट्यशाला । नाट्यशाला-संज्ञा खो० वह स्थान जहाँ पर अभिनय किया जाय । नाट्यशास्त्र - संज्ञा पुं० नृत्य, गीत और अभिनय की विद्या । नाठ -संज्ञा पुं० १. नाश । २. प्रभाव । नाठना- क्रि० स० नष्ट करना । कि० भ० १. नष्ट होना । २. भागना । नाठा - संज्ञा पुं० वह जिसके आगे- पीछे कोई वारिस न हो । नाड़ा-संज्ञा पुं० सूत की वह मोटी डोरी जिससे स्त्रियाँ घाँघरा या धोती बांधती हैं । नाड़ी - संज्ञा खो० नली ।