सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/४२१

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

नात नात | संज्ञा पुं० १. नातेदार । २. नाता । नात रु*- अव्य० अन्यथा । ४१३ नापाक जोड़ना । ३. गूंथना । ४. आरंभ करना । नानक - संज्ञा पुं० पंजाब के एक प्रसिद्ध नाता-संज्ञा पुं० रिश्ता । नाताक़त - वि० निर्बल । महात्मा जो सिख संप्रदाय के आदि- गुरु थे 1 नाती - संज्ञा पुं० [स्त्री० नतिनी नातिन ] नानकपंथी-संज्ञा पुं० गुरु नानक का , बेटी या बेटे का बेटा । नाते - क्रि० वि० १. संबंध से । २. हेतु । नातेदार - वि० [ संज्ञा नातेदारी ] रिश्तेदार | नाथ - संज्ञा पुं० १. प्रभु । मालिक । २. पति । ३. वह रस्सी जिसे बैल, भैंसे आदि की नाक छेदकर उन्हें वश करने के लिये डाल देते हैं । संज्ञा बी० १. नाथने की क्रिया या . भाव । २. जानवरों की नकेल । नाथना - क्रि० स० १. नकेल डालना । २. नत्थी करना । नाथद्वारा - संज्ञा पुं० उदयपुर राज्य के अंतर्गत वल्लभ संप्रदाय के वैष्णवों का एक प्रसिद्ध स्थान जहाँ श्रीनाथजी की मृति स्थापित है । नाद - संज्ञा पुं० १. शब्द । २. संगीत । नादना - क्रि० स० बजाना । . क्रि० प्र० १ बजना । २. लहलहाना । नादान - वि० मूर्ख, अनजान । नादिर - वि० धनाखा । नादिरशाही - संज्ञा स्त्री० भारी अंधेर या अत्याचार । बि० बहुत कठोर और उम्र । नादिहंद - वि० जिससे रकुम वसूल न हो । शब्द मादी - वि० [स्त्री० नादिनी ] १. करनेवाला । २. बजनेवाला । नाधना- क्रि० स० १. जोसना। २. अनुयायी । सिख । नानकशाही - वि० १. गुरु नानक से संबंध रखनेवाला | २. नानकशाह का शिष्य या अनुयायी । सिख । नानखताई - संज्ञा स्त्री० टिकिया के श्राकार की एक सांधी खस्ता मिठाई । नानबाई -संशा पुं० रोटियाँ पकाकर बेचनेवाला । नाना- वि० १. बहुत तरह के । २. बहुत । संज्ञा पुं० [स्त्री० नानी ] म का बाप । नानिहाल- संज्ञा पुं० नाना-नानी का स्थान या घर । नानी-संज्ञा स्त्री० माँ की माँ । ना-नुकर - संज्ञा पुं० इनकार | नान्हा - वि० छोटा । नाप - संज्ञा स्त्री० १. परिमाण | माप | २. नापने का काम । ३. नापने की वस्तु । नाप-जोख, नाप-तौल -संज्ञा श्री० १. नापने जोखने या तौलने की क्रिया । २. परिमाण या मात्रा जो नाप या तालकर स्थिर की जाय । नापना- क्रि० स० १. मापना । २. कोई वस्तु कितनी है, इसका पता लगाना । नापसंद - वि० १. जो पसंद न हो । २. अप्रिय । नापाक - वि० [ संज्ञा नापाकी ] १. अशुद्ध । २. मैला-कुचैला ।