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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/४२८

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निडरपन निडरपन, निडरपना-संज्ञा पु० निर्भयता । निढाल - वि० शिथिल । नितंत- क्रि० वि० दे० "बितांत" । नितंब - संज्ञा पुं० चूतड़ | ४२० निनाव प्रदर्शित करने का कार्य्यं । २. उदा- हरण । निदहना- क्रि० स० जलाना । निदाघ- संज्ञा पुं० १. गरमी । २. ग्रीष्म काल । नितंबिनी - संज्ञा स्त्री० सुंदर नितंब निदान -संज्ञा पुं० १. कारण । २. वाली स्त्री । सुंदरी । नित - अव्य० १. रोज़ । २. सदा । नितल - संज्ञा पुं० सात पातालों में से एक । नितात - वि० सर्वथा । निति - अव्य० दे० "नित" । नित्य - वि० १. जो सब दिन रहे । २. प्रति दिन का । अव्य० १. प्रति दिन । २. सदा । नित्यकर्म-संज्ञा पुं० १. प्रति दिन का काम । २. वह धर्म-संबंधी कर्म जिसका प्रति दिन करना आवश्यक ठहराया गया हो । नित्यक्रिया - संज्ञा स्त्री० नित्यकर्म । नित्यता- संज्ञा स्त्री० नित्य होने का भाव । नित्यत्व-संज्ञा पुं० नित्यता । नित्यनियम- संज्ञा पुं० रोज़ का कायदा नित्यप्रति भव्य ० हर रोज़ | नित्यशः - प्रव्य० १. प्रति दिन । २. सदा । निथंभ - संज्ञा पुं० खंभा । निथरना- क्रि० प्र० पानी या और किसी पतली चीज़ का स्थिर होना जिससे उसमें घुली हुई मैल आदि नीचे बैठ जाय । निधार - संज्ञा पुं० घुली हुई चीज़ के बैठ जाने से अलग हुआ साफ पानी । निदरना- क्रि० स० निरादर करना । निदर्शन- संज्ञा पुं० १. दिखाने या - रोगनिर्णय | ३. अंत । अव्य० अंत में । वि० निकृष्ट । निदारुण - वि० १. कठिन । २. दुःसह । निदिध्यासन -संज्ञा पुं० फिर फिर स्मरण । निदेश - संज्ञा पुं० १. शासन । श्राज्ञा । २. निद्रा - संज्ञा स्त्री० नींद । निद्रालु - वि० सोनेवाला । निद्रित - वि० सोया हुआ । निधड़क - क्रि० वि० १. बेरोक । २. बेखटके | निधन -संज्ञा पुं० १. नाश । मरण । वि० धनहीन । निधनी - वि० निर्धन । २. । निधान-संज्ञा पुं० १. आधार । २. निधि । निधि-संज्ञा स्त्री० खजाना । निधिनाथ, निधिपति - संज्ञा पुं० निधियों के स्वामी, कुबेर । निनरा - वि० अलग । निनाद - संज्ञा पुं० शब्द | निनादी - वि० [स्त्री० निनादिनी] शब्द करनेवाला । निनाव- संज्ञा पुं० मुँह के भीतरी भागों में निकलनेवाले महीन महीन लाल दाने जिनमें छरछराहट होती है ।