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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/४३६

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निशाकर निशाकर-संज्ञा पुं० १. चंद्रमा । २. मुरग़ा । निशाखातिर - संज्ञा स्त्री० तसल्ली । निशाचर - संज्ञा पुं० १. राक्षस । २. वह जो रात को चले । निशाचरी - संज्ञा स्त्री० १. राक्षसी । २. कुलटा । निशान-संज्ञा पुं० १. चिह्न । २. पता । • निशापति-संज्ञा पुं० चंद्रमा । निशाना - संज्ञा पुं० लक्ष्य । निशानाथ - संज्ञा पुं० चंद्रमा । निशानी - संज्ञा स्त्री० १ यादगार | २. निशान । निशामणि- संज्ञा पुं० चंद्रमा । निशि - संज्ञा स्त्री० रात | निशिकर - संज्ञा पुं० चंद्रमा । निशिचर-संज्ञा पुं० दे० "निशाचर" | निशिवासर:- संज्ञा पुं० रात-दिन | सदा । निशीथ - संज्ञा पुं० रात । निशीथिनी - संज्ञा स्त्री० रात । निशुंभ-संज्ञा पुं० वध । निश्चय - संज्ञा पुं० १. ऐसी धारणा जिसमें कोई संदेह न हो । २. निर्णय । २. एक अर्थालंकार जिसमें अन्य विषय का निषेध होकर प्रकृत या यथार्थ विषय का स्थापन होता है । निश्चयात्मक - वि० ठीक ठीक | निश्चल - वि० अटल । निश्चिंत वि० बेफ़िक्र । निश्चिंतता - संज्ञा स्त्री० बेफ़िक्री । निश्चित - वि० १ निर्णीत । २. पक्का । निश्चेष्ट - वि० १ बेहोश । निश्चल । निश्छल - वि० छल-रहित । ४२८ निष्कारण नि यस - संज्ञा पुं० १. मोच । २. कल्याण । निश्वास- संज्ञा पुं० नाक या मुँह के बाहर निकलनेवाला श्वास | निश्शंक - वि० १. निडर । २. संदेह- रहित । निश्शेष - वि० जिसमें से कुछ भी बाकी न बचा हो । निषंग-संज्ञा पुं० [वि० निषंगी ] १. तरकश । २. खड़ग । निषाद - संज्ञा पुं० १. एक बहुत पुरानी अनार्य जाति जो भारत में श्रार्य जाति के आने से पहले निवास करती थी । २. एक प्राचीन देश जो संभवतः शृंगवेरपुर के चारों २. ओर था । निषादी - संज्ञा पुं० महावत | निषिद्ध - वि० १. जिसका निषेध किया गया है। । २. ख़राब । निषेध-संज्ञा पुं० मनाही । निष्कंटक - वि० बिना खटके का । निष्कपट - वि० निश्छल । निष्कपटता - संज्ञा स्त्री० सरलता । निष्कर्म - वि० अकर्म | निष्कर्ष -संज्ञा पुं० : निश्चय । खुलासा । ३. निचोड़ | निष्कलंक - वि० निर्दोष । निष्काम - वि० [ संज्ञा निष्कामता ] १. ( वह मनुष्य ) जिसमें किसी प्रकार की कामना, श्रासक्ति या इच्छा न हो । २. ( वह काम ) जो बिना किसी प्रकार की कामना या इच्छा के किया जाय । निष्कारण - वि० १. बिना कारण । २. व्यर्थ ।