नहरि प्रहाद की रक्षा की थी । पुरुष । नृहरि - संज्ञा पुं० नृसिंह | ४३३ नेवतना १. २. श्रेष्ठ नेता संज्ञा पुं० [स्त्री० नेत्री ] ने। - प्रत्य० सकर्मक भूतकालिक क्रिया के कर्त्ता की विभक्ति । नेक - वि० भला । +वि० थोड़ा | क्रि० वि० थोड़ा । नेकचलन - वि० सदाचारी । संज्ञा नेकचलनो ] नेकनाम - वि० [ संज्ञा नेकनामी ] यशस्वी । नेकनीयत - वि० [ संज्ञा नेकनीयती ] अच्छे संकल्प का | नेकी -संज्ञा स्त्री० १. भलाई । २. सज्जनता । ३. उपकार । नेकु+ - वि०, क्रि० वि० दे० "नेक" । नेग-संज्ञा पुं० १. विवाह आदि शुभ अवसरों पर संबंधियों, श्राश्रितों तथा कृत्य में योग देनेवाले लोगों को कुछ दिए जाने का नियम । २. वह वस्तु या धन जो इस प्रकार दिया जाता है । नेगचार-संज्ञा पुं० दे० " नेगजेोग" । नेगजोग-संज्ञा पुं० विवाह यादि मंगल अवसरों पर संबंधियों तथा काम करनेवालों को उनके प्रसन्न- तार्थ कुछ दिए जाने का दस्तूर । नेगी-संज्ञा पुं० नेग पानेवाला । नेगीजोगी-संज्ञा पुं० नेग पानेवाले । नेजा - संज्ञा पुं० १. भाला । २. निशान । नेड़े | - क्रि० वि० निकट । । नेत -संज्ञा पुं० १. ठहराव । २. निश्चय । संज्ञा पुं० मथानी की रस्सी । संज्ञा खी० दे० " नीयत" । २८ नायक । २. स्वामी । ३. काम की चलानेवाला । संज्ञा पुं० मधानी की रस्सी । नेति - एक संस्कृत वाक्य ( न इति ) जिसका अर्थ है " इति नहीं" अर्थात् "श्रत नहीं है" । नेती - संज्ञा स्त्री० वह रस्सी जो मथानी में लपेटी जाती है और जिसके खींचने से मथानी फिरती है । नेत्र - संज्ञा पुं० १. आँख । २. मधानी की रस्सी । नेत्रजल - संज्ञा पुं० आँसू । नेत्र मंडल - संज्ञा पुं० आँख का घेरा । नेत्रस्राव -संज्ञा पुं० आंखों से पानी बहना । नेपचून-संज्ञा पुं० सूर्य्यं की परिक्रमा करनेवाला एक ग्रह | नेपथ्य -संज्ञा पुं० १. सजावट । २. नृत्य, श्रभिनय श्रादि में परदे के भीतर का वह स्थान जिसमें नट वेश सजते हैं। नेपाल - संज्ञा पुं० हिंदुस्तान के उत्तर में एक प्रसिद्ध पहाड़ी देश । नेपाली - वि० १. नेपाल में रहने या होनेवाला । २. नेपाल - संबंधी । नेब - संज्ञा पुं० १. सहायक । मंत्री | नेम - संज्ञा पुं० नियम । नेमी - वि० १. नियम का पालन करने- २. धर्म की दृष्टि से पूजा- वाला । पाठ, व्रत आदि करनेवाला । नेरे + - क्रि० वि० निकट । नेवगः -संज्ञा पुं० दे० "नेग" । नेवज - संज्ञा पुं० भोग । २. नेवतना + - क्रि० स० निमंत्रित करना ।
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