पठिया 'पठिया - संज्ञा स्त्री० जवान और तगड़ी स्त्री । पठानी +-संज्ञा स्त्री० दे० "पठावनी" । पठ्यमान- वि० पढ़ा जाने के योग्य । पड़छती, पड़छती - संज्ञा खो० १. भीत की रक्षा के लिये लगाया जाने- वाला छप्पर या टट्टी । २. कमरे श्रादि के बीच की पाटन जिस पर चीज़ असबाब रखते हैं । - पड़त - संज्ञा स्त्री० दे० पड़ता - संज्ञा पुं० " पड़ता " । १. लागत । २. दर । पड़ताल - संज्ञा स्त्री० अनुसंधान । पड़तालना- क्रि० स० जाँचना । पड़ती-संज्ञा स्त्री० वह भूमि जिस पर कुछ काल से खेती न की गई हो । पड़ना- क्रि० प्र० ५. गिरना । । २. बिछाया जाना । ३. दाखिल होना । ४. टिकना । ५. आराम करना । ६. बीमार होना । ७ मार्ग में मिलना । ८. उत्पन्न होना । पड़पड़ाना- क्रि० श्र० १ पड़पड़ • शब्द होना । २. चरपराना । पड़पोता - संज्ञा पुं० [स्त्री० पड़पोती ] पुत्र का पोता । पड़ाव -संज्ञा पुं० १. यात्री - समूह का यात्रा के बीच में अत्रस्थान | २. वह स्थान जहाँ यात्री ठहरते हैं। । पाड़या - संज्ञा स्त्री० भैंस का मादा बच्चा । पड़ोस - संज्ञा पुं० १. किसी के घर के श्रीस-पास के घर । २. किसी स्थान के आस-पास के स्थान । पड़ोसी -संज्ञा पुं० [स्त्री० पड़ोसिन ] वह मनुष्य जिसका घर पड़ोस में हो । पढ़ना- क्रि० स० १. किसी पुस्तक, પૃષ્ઠ पतझड़ लेख आदि को इस प्रकार देखना कि उसमें लिखी बात मालूम हो जाय । २. बाँचना | पढ़वाना- क्रि० स०१. किसी को पढ़ने में प्रवृत्त करना । २. किसी के द्वारा किसी को शिक्षा दिलाना । पढ़ाई - संज्ञा स्त्री० १. पढ़ने का काम | विद्याभ्यास । २. पढ़ने का भाव । संज्ञा स्त्री० १. पढ़ाने का काम । २. अध्यापन शैली | । | पढ़ाना- क्रि० स० शिक्षा देना । पण - संज्ञा पुं० १. जुम्रा । २. प्रतिज्ञा परणव-संज्ञा पुं० छोटा नगाड़ा या ढोल | १. पराय - वि० 3. खरीदने या बेचने योग्य । २. प्रशंसा करने योग्य | परायशाला - संज्ञा स्त्री० दूकान । पतंग - संज्ञा पुं० १. पक्षी । २. गुड्डी । पतंगबाज़ - संज्ञा पुं० वह जिसको पतंग उड़ाने का व्यसन हो । पतंगसुत-संज्ञा पुं० श्रश्विनीकुमार । पतंगा - संज्ञा पुं० १. पतंग। कोई उड़ने- वाला कीड़ा-मकोड़ा । २. फतिरंगा । पतंचिका - संज्ञा स्त्री० धनुष की डेरी । पतंजलि -संज्ञा पुं० १. एक प्रसिद्ध ऋषि जिन्होंने योग- शास्त्र की रचना की । २. एक प्रसिद्ध मुनि जिन्होंने पाणिनीय सूत्रों और कात्यायन- कृत उनके वार्त्तिक पर 'महाभाष्य' की रचना की थी । पती - संज्ञा पुं० १. पति । २. मालिक । संज्ञा स्त्री० १, भावरू । २. प्रतिष्ठा । पतझड़ -संज्ञा स्त्री० १. वह ऋतु
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