पली उजला होना । २. ताप । पली -संज्ञा बी० तेल, घी आदि द्रव पदार्थों को बड़े बरतन से निकालने का लोहे का एक उपकरण । पलीता - संज्ञा पुं० [खी० अल्पा ० पलीती] १. बत्ती के आकार में लपेटा हुश्श्रा वह काग़ज़ जिस पर कोई यंत्र लिखा हो । २. वह बत्ती जिससे बंदूक या तोप के रंजक में श्राग लगाई जाती है । ३. कपड़े की वह बत्ती जिसे पनशाखे पर रखकर जलाते हैं । वि० बहुत क्रुद्ध । बहुत कड़श्रा । पलीद - वि० १. अपवित्र । २. घृणा - स्पद । ३. नीच । संज्ञा पुं० भूत । पलुना । -संज्ञा पुं० पालतू । पलुहना-क्रि० होना । पलुहाना+-क्रि० करना । श्र० हरा-भरा स० हरा-भरा पलेथन-संज्ञा पुं० परधन | पलोटना- क्रि० स० १. पैर दबाना | २. दे० " पलटना" । क्रि० प्र० तड़फड़ाना | पलोधन- संज्ञा पुं० दे० "पलेथन" । पल्लव - संज्ञा पुं० १. कोंपल । २. हाथ मैं पहनने का कड़ा या कंकण । ३. विस्तार । ४. दक्षिण का एक प्राचीन राजवंश जिसका राज्य उड़ीसा से तुंगभद्रा नदी तक था । पल्लवना - क्रि० प्र० पल्लवित होना । पल्लवित - वि० १. जिसमें नए नए पत्ते हैं। । २. हरा-भरा । पल्ला - क्रि० वि० दूर । संज्ञा पुं० दूरी । संज्ञा पुं० १. कपड़े का छोर । २. । ४६१ दूरी । ३. तरफ़ । पवन सुत संज्ञा पुं० १. दुपल्ली टोपी का आधा भाग २. किवाड़ । ३. पहल | ४. तीन मन का बोझ । संज्ञा पुं० तराजू में एक ओर का टोकरा या डलिया । संज्ञा पुं० कुँची के दो भागों में से एक भाग । वि० दे० "परला " । पल्ली - संज्ञा ख० १. छोटा गाँव । २. कुटी । पल्ले - वि० दे० १. " परलय" । २. दे० "पल्ला" । पल्लेदार - संज्ञा पुं० १. अनाज ढोने- वाला मज़दूर | वाला आदमी । २. गुल्ला तौलने- पल्लेदारी - संज्ञा स्त्री० पल्लेदार का काम । पल्लो - संज्ञा पुं० पल्लव | संज्ञा पुं० पल्ला | पवन - संज्ञा पुं० १. वायु । २. जल ३. साँस ।
- संज्ञा पुं० दे० "पावन" ।
पवन कुमार - संज्ञा पुं० १. हनुमान् । २. भीमसेन । पवन चक्की -संज्ञा स्त्री० वह चक्की या कल जो हवा के ज़ोर से चलती हो । पवन-चक्र- संज्ञा पुं० बवंडर | पवन तनय - संज्ञा पुं० १. हनुमान् । २. भीमसेन । पवनपति -संज्ञा पुं० वायु के अधि- ष्ठाता देवता । - पवन पुत्र संज्ञा पुं० १. हनुमान् । २. भीमसेन । पवन सुत -संज्ञा पुं० १. हनुमान् ।