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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/४७३

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पहुँचा पहुँचा -संज्ञा पुं० कलाई । पहुँचाना - क्रि० स० १. घुमाना । २. किसी के साथ इसलिये जाना जिसमें वह अकेला न पड़े । ३. किसी को विशेष अवस्था तक ले जाना । पहुँची - संज्ञा स्त्री० कलाई पर पहनने का एक आभूषण । पहुना ! - संज्ञा पुं० दे० " पाहुना” | पहुनाई -संज्ञा स्त्री० १. अतिथि रूप में कहीं जाना या श्राना । श्रतिथि- सत्कार | पहुप -संज्ञा पुं० दे० "पुष्प" । पहुमी-संध स्त्री० दे० " पुहमी " । पहुला -संज्ञा पुं० कुमुदिनी । पहेली - संज्ञा स्त्री० १. बुझौवल । २. समस्या । - २. चारों पह्नव संज्ञा पुं० एक प्राचीन जाति । प्राचीन पारसी या ईरानी । पह्नवी - संज्ञा स्त्री० श्राधुनिक फ़ारस के मध्यवर्ती काल की फ़ारस की भाषा । पाँ, पाँइ - संज्ञा पुं० पाँव | पाँईबाग़- संज्ञा पुं० महलों के श्रोर का छोटा बाग़ जिसमें राज- महल की स्त्रिर्या सैर करने जाती हैं । पाँउ-संज्ञा पुं० पैर । पाँक-संज्ञा पुं० कीचड़ । पाँख-संज्ञा पुं० पंख | पांखी-संज्ञा स्त्री० पतिरंगा । पाँखुरी | - संज्ञा स्त्री० दे० "पँखड़ी" । पाँच - वि० १. जे गिनती में चार और एक हो । २. पंच | पांचजन्य-संज्ञा पुं० कृष्ण के बजाने का शंख | पांचभौतिक-संज्ञा पुं० पाँच भूत या तत्त्वों से बना हुआ शरीर । ३० ४६५ पाँचता पांचाल - संज्ञा पुं० दे० "पंचाल ” । वि० पांचाल देश का रहनेवाला । पांचाली - संज्ञा बी० पांडवों की स्त्री द्रौपदी । पाँच - संज्ञा स्त्री० पंचमी । पाँजना- क्रि० स० टीका लगाना । पाँजर - संज्ञा पुं० १. बग़ल और कमर भाग जिसमें पस- के बीच का वह लियाँ होती हैं । २. पसली । पांडव - संज्ञा पुं० कुंती और माद्री के पांडु के पांचों गर्भ से उत्पन्न राजा पुत्र । पांडवनगर - संज्ञा पुं० दिल्ली । पांडित्य -संज्ञा पुं० विद्वत्ता । पांडु - सज्ञा पुं० १. कुछ लाली लिए पीला रंग । २. एक रोग का नाम जिसमें शरीर का चमड़ा पीले रंग का हो जाता है । ३. प्राचीन काल के एक राजा का नाम जो पांडव वंश के श्रादिपुरुष थे । पांडुता - संज्ञा स्त्री० पीलापन । २. सफेद । पांडुर - वि० १. पीला । ३. कामला रोग । ४. सफेद कोढ़ । पांडुलिपि -संज्ञा बी० मसौदा | लेख श्रादि का पहला रूप । पांडुलेख - संज्ञा पुं० दे० " पांडुलिपि " । पाँड़े - संज्ञा पुं० १. ब्राह्मणों की एक शाखा । २. पंडित । पांडेय - संज्ञा पुं० दे० " पड़े" । पाँति - संज्ञा खो० कुतार । पांथ - वि० पथिक । पांथनिवास-संज्ञा पुं० सराय । चड्डी । पाँय-संज्ञा पुं० चरण । पैर । पाँयता - संज्ञा पुं० पलंग, खाट या बिस्तर का वह भाग जिसकी ओर