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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/४७७

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पातक બા क्रांतिवृत्त को काटकर ऊपर चढ़ती पाथेोज-संज्ञा पुं० कमल । या नीचे जाती हैं । संज्ञा पुं० पत्ता । पत्र | पातक-संज्ञा पुं० वह कर्म जिसके करने से नरक जाना पड़े। गुनाह | पाप । पातकी - वि० पातक करनेवाला । पापी । कुकर्मी । पातर -- संज्ञा स्त्री० पत्तल । संज्ञा स्त्री वेश्या । रंडी । ० पातशाह -संज्ञा पुं० दे० "बादशाह" । पातापा - संज्ञा पुं० पैरों में पहनने का मोजा । पाताल - सज्ञा पुं० १. पुराणानुसार पृथ्वी के नीचे के सात लोकों में से सातव । २. पृथ्वी से नीचे के लेक | पातिव्रत, पातिव्रत्य - मंशा स्त्री० पति व्रता होन का भाव । पाती - सज्ञा स्त्री० १ चिट्ठी । पत्र । २. वृद के पत्ते । पातुर | संज्ञा स्त्री० वेश्या । पात्र - संज्ञा पुं० १. जिसमें कुछ रखा जा सके । श्राधार । बरतन । विषय होने का भाजन । २. वह जो किसी का अधिकारी हो; जैसे, दानपात्र । ३. नाटक के नायक, नायिका श्रदि । ४ अभिनेता | पात्रता-संज्ञा स्त्री० पात्र भाव। योग्यता । पाथ - संज्ञा पुं० १. जल । २. सूर्य । ३. श्रभि । ४. अ । ५. श्राकाश । ६. वायु । पाथना - क्रि० स० १. सुडौल करना । २. थोप, पीट या दबाकर बड़ी बड़ी टिकिया या पटरी बनाना । पाथर + संज्ञा पुं० दे० "पत्थर" । पाथोधि-संज्ञा पुं० समुद्र । पाद्यार्घ पाद - संज्ञा पुं० १. चरण । पैर । पवि । २. श्लेाक या पद्य का चतुर्थांश । पद । चरण | ३. चौथा भाग । चौथाई । सज्ञा पुं० वह वायु जो गुदा के मार्ग से निकले । अपानवायु । अधो- वायु । गोज़ । पादतल - संज्ञा पुं० पैर का तलवा | पादत्र, पादत्राण - संज्ञा पुं० खड़ाऊँ । २. जूता । - • पादप संज्ञा पुं० वृत्त । पेड़ | पादपीठ -संज्ञा पुं० पीढ़ा । पादपूरण-संज्ञा पुं० श्लोक या कविता के किसी चरण को पूरा करना । पादरी-संज्ञा पुं० ईसाई धर्म का पुरो- हित जो अन्य ईसाइयों का जातकर्म श्रादि संस्कार और उपासना कराता है । - पादशाह - संज्ञा पुं० दे० "बादशाह" | पादाक्रांत - वि० पददलित । पैर से कुचला हुआ । पामाल । पादाति, पादातिक-संज्ञा पुं० पैदल सिपाही । पादुका - संज्ञा खो० खड़ाऊँ । पादोदक-संज्ञा पुं० १. वह जल जिसमें पैर धोया गया हो । २. चरणामृत । पाद्य-संज्ञा पुं० वह जल जिससे पूज- नीय व्यक्ति या देवता के पैर धोए जाय । पाद्यार्घ -संज्ञा पुं० १. पैर तथा हाथ धोने या धुलाने का अक्ष। २. पूजा की सामग्री ।