पारी में किया जाय; जैसे, पारिभाषिक शब्द | पारी-संज्ञा खो० किसी बात का अव सर जो कुछ अंतर देकर क्रम से प्राप्त हो । बारी । पारुष्य - संज्ञा पुं० १. वचन की कठो पारुष्य-संज्ञा ०१. २. पृथ्वीपति । अर्जुन । । ३. रता । बात का कड़वापन | २. इंद्र का वन । पार्थ-संज्ञा पुं० १. ( पृथा का पुत्र ) अर्जुन वृक्ष | पार्थक्य -संज्ञा पुं० १. पृथक होने का भाव । भेद । २. जुदाई | वियोग | पार्थिव - वि० १. पृथिवी - संबंधी । २. पृथ्वी से उत्पन्न । मिट्टी श्रादि का बना हुआ । संज्ञा पु० मिट्टी का शिवलिंग जिसके पूजन का बड़ा फल माना जाता है । पार्वण - संज्ञा पुं० वह श्राद्ध जो किसी पर्व में किया जाय । पार्वती-संज्ञा स्त्री० हिमालय पर्वत की कन्या, शिव की श्रद्धांगिनी देवी जो गौरी, दुर्गा श्रादि अनेक नाम से पूजी जाती हैं। गिरिजा । गौरी । पार्वतीय - संज्ञा पुं० पहाड़ का । पहाड़ी । पार्श्व-संज्ञा पुं० छाती के दाहिने या बायें का भाग । बगल । पार्श्वग - संज्ञा पुं० सहचर । पार्श्वनाथ - संज्ञा पुं० जैन के तेईसवें तीर्थकर जो वाराणसी के वंशीय राजा श्रश्वसेन के इक्ष्वाकु- पुत्र थे । पाश्र्ववर्ती मंज्ञा पुं० पास रहनेवाला । मुसाहब । पार्षद- संज्ञा पुं० १. पास रहनेवाला । ४७३ पालना सेवक । पारिषद् । २. मुसाहब । मंत्री । पाल - संज्ञा पुं० बंगाल का एक प्रसिद्ध राजवंश जिसने साढ़े तीन सौ वर्ष तक वंग और मगध में राज्य किया था । संज्ञा स्त्री० फलों को गरमी पहुँचा - कर पकाने के लिये पत्ते बिछाकर रखने की विधि | संज्ञा पुं० १. वह लंबा-चौड़ा कपड़ा जिसे नाव के मस्तूल से लगाकर इसलिये तानते हैं जिसमें हवा भरे और नाव को ढकेले । २. तंबू । शामियाना | चंदोवा | संज्ञा स्त्री० १. पानी को रोकनेवाला बाँध या किनारा | मेड़ । २. ऊँचा किनारा | कगार | पालक संज्ञा पुं० १. पालनकर्त्ता । २. श्रश्वरक्षक । साईस । ३. पाला हुश्रा लड़का | दत्तक पुत्र । संज्ञा पुं० एक प्रकार का साग । पालकी - संज्ञा खी० एक प्रकार की सवारी जिसे श्रादमी कंधे पर लेकर चलते हैं । म्याना । खड़खड़िया । संज्ञा स्त्री० पालक का शाक । पालतू - वि० पाला हुआ । पोसा हुधा । पालन- संज्ञा पुं० भोजन, वस्त्र आदि देकर जीवन रक्षा | भरण-पोषण । परवरिश | पालना- क्रि० स० १. भोजन, वस्त्र आदि देकर जीवन रक्षा करना । भरण-पोषण करना । २. रखना । करना । परवरिश पशु-पक्षी आदि को संज्ञा पुं० एक प्रकार का भूखा या
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