पूर्ववर्ती ४८७ पूर्ववर्ती - वि० पहले का | पूर्ववृत्त - संज्ञा पुं० इतिहास | पूर्वानुराग-संज्ञा पुं० वह प्रेम जो किसी के गुण सुनकर अथवा उसका चित्र या रूप देखकर उत्पन्न होता है । पूर्वापर - क्रि० वि० आगे-पीछे | वि० अगला और पिछला । पूर्वाफाल्गुनी दे० "पूर्वफाल्गुनी” । पूर्वाभाद्रपद - दे० "पूर्वभाद्रपद " । पूर्वार्द्ध-संज्ञा पुं० पहला श्राधा भाग। पूर्वाषाढ़ा - संज्ञा स्त्री० २७ नक्षत्रों में बीस नक्षत्र जिसमें चार तारे हैं। पूर्वाह्न -संज्ञा पुं० सबेरे से दुपहर तक का समय | पूर्वी - वि० पूर्व दिशा से संबंध रखने- वाला । - पूला संज्ञा पुं० [ श्री० अल्पा० पूली ] मूँज आदि का बँधा हुआ मुट्ठा । पूषण - संज्ञा पुं० सूर्य्य । पूषा-संज्ञा पुं० दे० " पूषण" । पूल - संज्ञा पुं० वह चांद्र मास जो अगहन के बाद पड़ता है। पौष । पृच्छक - वि० पूछनेवाला । पृथक - वि० [ संज्ञा पृथक्ता ] भिन्न । पृथक्करण-संज्ञा पुं० अलग करने का काम । पृथिवी - संज्ञा स्त्री० दे० "पृथ्वी" । पृथु - वि० १. चौड़ा । २. बड़ा । संज्ञा पुं० राजा वेणु के पुत्र का नाम । पृथुता-संज्ञा खो० १. पृथु होने का भाव । २. विस्तार । पृथ्वी -संज्ञा स्त्री० १. भूमि । ज़मीन । २. मिट्टी । । पेचीदा पृथ्वीतल - संज्ञा पुं० १. ज़मीन की सतह । २. संसार । पृष्ठ- वि० पूछा हुआ । पृष्ठ-संज्ञा पुं० १. पीठ । २. पीछे का भाग । ३. पुस्तक के पत्रे का एक श्रर का तल । ४. पद्मा । पृष्ठपोषक - संज्ञा पुं० १. पीठ ठोंकने- वाला । २. सहायक । पेंग-संज्ञा स्त्री० झूले का झूलते समय एक ओर से दूसरी ओर को जाना । पेंडुकी-संशा स्त्री० १. पंडुक पक्षो । २. सुनारों की फुकनी । पैदा- संज्ञा पुं० [स्त्री० अल्पा० पेंदी] तला । पेखना + - कि० स० देखना । पेच - संज्ञा पुं० १. घुमाव । २. संकट । ३. चालाकी । ४. यंत्र । ५. मशीन | का पुरज़ा । ६. कुश्ती का दाँव । ७. युक्ति । । पेचक - संश स्त्री० बटे हुए तागे की गोली या गुच्छी । पेचकश - संज्ञा पुं० बढ़इयों और लोहारों आदि का वह श्रौज़ार जिससे वे लोग पेच जड़ते श्रथवा निकालते हैं । पेचदार - वि० १. जिसमें कोई पेच या कल हो । २. दे० "पेचीला" । पेचवान - संज्ञा पुं० १. बड़ी सटक जो फ़र्शी या गुड़गुड़ी में लगाई जाती है । २. बड़ा हुक्का । पेचा। -संज्ञा पुं० [स्त्री० पेची ] उल्लू पक्षी । पेचिश - संज्ञा स्त्री० पेट की वह पीड़ा जो अवि होने के कारण होती है । पेचीदा - वि० [ संज्ञा जिसमें पेच हो । और कठिन हो । पेचीदगी ] १. २. जो टेढ़ा-मेढ़ा
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