प्रणय प्रणय - संज्ञा पुं० १. प्रीतियुक्त प्रार्थना । २. प्रेम । प्रणयन -संज्ञा पुं० रचना । बनाना । प्रणयिनी -संज्ञा बी० १. प्रियतमा । प्रेमिका । २. स्त्री । पत्नी । प्रणयी संज्ञा पुं० [ खो० प्रणयिनो ] १. प्रेम करनेवाला । प्रेमी । २. स्वामी । पति । प्रणव-संज्ञा पुं० १. ॐकार । श्रकार मंत्र | २. परमेश्वर । १. नाली । । २. प्रणाली - संज्ञा स्त्री० रीति । चाल । प्रणिधान - संज्ञा पुं० १. अत्यंत भक्ति । २. ध्यान । चित्त की एकाग्रता । प्रणीत-संज्ञा पुं० रचित | बनाया हुआ । प्रणेता संज्ञा पुं० [ खी० प्रयेत्री ] रच- यिता । बनानेवाला । 1 प्रतप्त - वि० तपा हुआ । ४६५ प्रतिनायक समान, जैसे, प्रतिनिधि | मुकाबले का; जैसे, प्रतिवादी । अव्य० १. सामने । मुकाबिले में । २. ओर । तरफ़ । संज्ञा स्त्री० नकुल । कापी । प्रतिकार-संज्ञा पुं० बदला । जवाब | प्रतिकूल - वि० [ संज्ञा प्रतिकूलता ] जो अनुकूल न हो । विरुद्ध । विपरीत | प्रतिकृति - संज्ञा स्त्री० १. प्रतिमा । २. तसवीर । ३. बदला । प्रतिकार । प्रतिक्रिया - संश स्त्री० बदला । प्रतिगृहीता-संज्ञा स्त्री० धर्मपत्नी । प्रतिग्रह - संज्ञा पुं० १. स्वीकार । ग्रहण । २. पकड़ना । अधिकार में लाना । ३. पाणिग्रहण | विवाह | प्रतिघात -संज्ञा पुं० टक्कर | प्रतिघाती - संज्ञा पुं० [स्त्री० प्रतिघातिनो ] १. बैरी । दुश्मन । करनेवाला | प्रतल -संज्ञा पुं० पाताल के सातवें प्रतिच्छाया - संज्ञा स्त्री० भाग का नाम ! प्रताप-संथा पुं० १. पौरुष । २. बल, पराक्रम आदि का ऐसा प्रभाव जिसके कारण विरोधी शांत रहें । इकबाल । प्रतापी - वि० इक़बालमंद | जिसका प्रताप हो । प्रतारक-संज्ञा पुं० १. वंचक । ठग । २. धूर्त । प्रतारणा -संज्ञा स्रो० वंचना । ठगी । प्रतिधा - संज्ञा स्त्री० धनुष की डोरी । ज्या । प्रति-अव्य० एक उपसर्ग जो शब्दों के आरंभ में लगकर नीचे लिखे अर्थ देता है— विपरीत; जैसे, प्रतिकूल । सामने; जैसे, प्रत्यक्ष । बदले में; जैसे, प्रत्युपकार । हर एक; जैसे, प्रत्येक । २. मुकाबला १. चित्र । | तसवीर । २. परछाई ।। प्रतिज्ञा-संज्ञा स्त्री० १. कोई काम करने या न करने आदि के संबंध में दृढ़ निश्चय । प्रण । कुसम | २. उस बात का कथन जिसे सिद्ध क रना हो । प्रतिज्ञापत्र - संज्ञा पुं० वह पत्र जिस पर कोई प्रतिज्ञा या शर्तें लिखी हों । प्रतिदान -संज्ञा पुं० १. वापस करना । २. बदला । लै। टाना । परिवर्तन । प्रतिद्वंद्वी -संज्ञा पुं० [भाव० प्रतिद्वंद्विता] मुकाबले का लड़नेवाला । शत्र । प्रतिध्वनि-संज्ञा स्त्री० टकराकर सुनाई पड़नेवाला शब्द | गूँज । प्रतिनायक-संज्ञा पुं० नाटकों और
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