प्रयाग ५०१ प्रवचन प्रयाग - संज्ञा पुं० एक प्रसिद्ध तीर्थ जो प्रलंबी - वि० १. दूर तक लटकने- गंगा-यमुना के संगम पर है । इलाहाबाद | प्रयागवाल - संज्ञा पुं० प्रयाग तीर्थ का पंडा । प्रयाण - संज्ञा पुं० गमन । यात्रा । प्रस्थान | प्रयास - संज्ञा पुं० १. प्रयत्न । उद्योग । २. श्रम | मेहनत । प्रयुक्त वि० अच्छी तरह जोड़ा या मिलाया हुआ । सम्मिलित । प्रयुत-संज्ञा पुं० दस लाख की संख्या । प्रयोग - संज्ञा पुं० १. इस्तेमाल । बरता जाना। २. क्रिया का साधन । विधान । ३. मारण, मोहन श्रादि तांत्रिक उपचार या बारह कहे जाते हैं । ४. अभिनय । नाटक का खेल । ५. यज्ञादि कर्मों के अनुष्ठान का बोध कराने- वाली विधि । पद्धति । ६. दृष्टांत । निदर्शन | साधन जो प्रयोगी, प्रयोजक- संज्ञा पुं० १. प्रयोगकर्ता । अनुष्ठान करनेवाला । २. प्रदर्शक । प्रेरक | प्रयोजन - संज्ञा पुं० १. कार्य । काम । अर्थ | २. उद्देश्य | अभिप्राय । ३. उपयोग । मतलब । व्यवहार । आशय । प्रयोजनीय - वि० काम का । लब का । मत- प्ररोचना - संज्ञा स्त्री० चाह या रुचि उत्पन्न करना । प्ररोहण - संज्ञा पुं० प्ररोह । चढ़ाव । प्रलंब - वि० लंबा । । प्रलंबन - संज्ञा पुं० अवलंबन । सहारा । वाला । २. सहारा लेनेवाला । प्रलयंकर - वि० प्रलयकारी । सर्व- नाशकारी । प्रलय - संज्ञा पुं० लय को प्राप्त होना । न रह जाना । - प्रलाप संज्ञा पुं० व्यर्थ की बकवाद | पागलों की सी बड़बड़ | प्रलेप - संज्ञा पुं० श्रंग पर कोई गीली दवा छोपना या रखना । लेप | प्रलेपन-संज्ञा पुं० लेप करने की क्रिया | प्रलोभ, प्रलोभन -संज्ञा पुं० नोभ दिखाना । लालच दिखाना । प्रवंचना - संज्ञा स्त्री० छल । ठगपना । धूर्तता । प्रवचन -संज्ञा पुं० १. अच्छी तरह समझाकर कहना । २. व्याख्या । प्रवण-संज्ञा पुं० क्रमशः नीची होती हुई भूमि | ढाल | वि० ढालुवा । जो क्रमशः नीचा होता गया हो । २. प्रवर - वि० श्रेष्ठ | बड़ा । मुख्य । संज्ञा पुं० १. किसी गोत्र के अंतर्गत विशेष विशेष प्रवर्त्तक मुबि । संतति । प्रवर्त-संज्ञा पुं० कार्यारंभ | प्रवत्त क-संज्ञा पुं० १. किसी काम को चलानेवाला । संचालक । २. ईजाद करनेवाला । ३. नाटक में प्रस्तावना का वह भेद जिसमें सूत्र- धार वत्तमान समय का वर्णन करता हो और उसी का संबंध लिए पात्र का प्रवेश हो । प्रवर्त्तन-संज्ञा पुं० १. कार्य प्रारंभ
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