सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५१४

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

प्रायद्वीप ५०६ प्रेक्षक प्रायद्वीप - संज्ञा पुं० स्थल का वह भाग जो तीन ओर पानी से घिरा हो । प्रायशः - क्रि० वि० प्रायः । बहुधा । प्रायश्चित्त-संज्ञा पुं० शास्त्रानुसार वह कृत्य जिसके करने से मनुष्य के पाप छूट जाते हैं । प्रारंभ -संज्ञा पुं० १. शुरू । २. श्रादि । प्रारंभिक - वि० प्रारंभ का । । प्रारब्ध - वि० १. आरंभ किया हुआ । २. भाग्य | किसमत । प्रारब्धी - वि० भाग्यवान् । प्रार्थना - संज्ञा स्त्री० किसी से कुछ याचना । निवेदन | माँगना | क्रि० स० प्रार्थना या विनती करना । ब्राह्म प्रार्थनापत्र - संज्ञा पुं० वह पत्र जिसमें किसी प्रकार की प्रार्थना लिखी हो । निवेदन पत्र | श्रर्ज़ी | प्रार्थना समाज-संज्ञा पुं० समाज की तरह का एक नवीन समाज या संप्रदाय | प्रार्थनीय - वि० प्रार्थना करने योग्य । प्रार्थी - वि० प्रार्थना या प्रार्थना या निवेदन करनेवाला । प्रालेय- संज्ञा पुं० १. हिम । तुषार । २. बफ । प्रावृट - संज्ञा पुं० वर्षा ऋतु । प्रावृटू-संज्ञा 1 प्राशन-संज्ञा पुं० खाना | भोजन | जैसे, श्रनप्राशन । प्रासंगिक - वि० १. प्रसंग-संबंधी । प्रसंग का । २. प्रसंग द्वारा प्राप्त । प्रासाद - संथा पुं० लंबा, चौड़ा, ऊँचा और पक्का या पत्थर का घर । विशाल भवन | प्रियंगु-संज्ञा स्त्री० कँगनी नामक अन । पति । प्रियंवद - वि० प्रियवचन कहने वाला । प्रियभाषी । प्रिय - संज्ञा पुं० स्वामी । वि० १. जिससे प्रेम हो । २. मनोहर । सुंदर । प्रियतम - वि० प्राणों से भी बढ़कर प्रिय | प्यारा । संज्ञा पुं० स्वामी । पति । प्रिय दर्शन- वि० जो देखने में प्रिय लगे । सु ंदर | प्रियदर्शी - वि० सबको प्रिय समझने या सबसे स्नेह करनेवाला । प्रियभाषी - वि० मधुर वचन बोलने- वाला । प्रियवर - वि०ति प्रिय । सबसे प्यारा । ( पत्रों आदि में संबोधन ) प्रियवादी - संज्ञा पुं० दे० "प्रियभाषी" । प्रिया -संज्ञा स्त्री० १. नारी । १. २. पत्नी । ३. प्रेमिका स्त्री । प्रीत - वि० प्रीतियुक्त ।

  • संज्ञा पुं० दे० "प्रीति" ।

प्रीतम - संज्ञा पु० १. पति । स्त्री । भर्ता । स्वामी । २. प्यारा । प्रीति - संज्ञा स्त्री० प्रेम । प्यार । प्रीतिकर, प्रीतिकारक - वि० प्रस- नता उत्पन्न करनेवाला । प्रेमजनक | प्रीतिपात्र - संज्ञा पुं० प्रेमभाजन । प्रीतिभोज - संज्ञा पुं० वह खान-पान जिसमें मिश्र, बंधु श्रादि प्रेमपूर्वक सम्मिलित हैं। । प्रीत्यर्थ - श्र अव्य० प्रीति के कारण । प्रसन्न करने के वास्ते । खण-संज्ञा पुं० [अच्छी तरह हिलना या भूलना । प्रेक्षक-संज्ञा पुं० देखनेवाला । दर्शक ।