फर्राटा ५१२ पल्ला जो पल्ला । तेज़ी । शाल आदि का ऊपरी अलग बनता है । चद्दर । फर्राटा - संज्ञा पुं० १. वेग । क्षिप्रता । फर्श - संज्ञा पुं० १. बिछावन | बिछाने का कपड़ा । २. दे० " फ़रश" । फल - संज्ञा पुं० १. वनस्पति में होने- वाला वह बीज या गूदे से परि- पूर्ण बीज-कोश जो किसी विशिष्ट ऋतु में फूलों के थाने के बाद उत्पस होता है । २. प्रयत्न या क्रिया का परिणाम | नतीजा । ३. बाण, भाले, छुरी आदि का वह तेज़ अगला भाग जिससे आघात किया जाता है । ४. हल की फाल । फलक-संज्ञा पुं० १. श्राकाश । २. स्वर्ग । फलका - संज्ञा पुं० फफोला । छाना । झलका । फलतः - अव्य० फल स्वरूप | परि- णामतः । इसलिये | फलदान - संज्ञा पुं० हिंदुश्नों में विवाह पक्का करने की एक रीति । फलदार - वि० १. जिसमें फल लगे हों । २. जिसमें फल लगें । फलना- क्रि० प्र० १. फल से युक्त होना । २. लाभदायक होना । फलहरी / - संज्ञा स्त्री० १. वन के वृक्षों के फल । मेवा । वनफल । २. फल । फलहार - संज्ञा पुं० दे० " फलाहार" | फलहारी - वि० जिसमें अन्न न पड़ा हो अथवा जो अन्न से न बना हो, बल्कि फलों से बना हो । फलाँ - वि० ० अमुक । फलाना । फलांग - संज्ञा जी० १. एक स्थान से उछलकर दूसरे स्थान पर जाना । फहराना कुदान | चौकड़ी । २. वह दूरी जो फर्लांग से तै की जाय । फलाँगना - क्रि० प्र० एक स्थान से उछलकर दूसरे स्थान पर जाना । कूदना | फाँदना | फलागम - संज्ञा पुं० १. फल लगने की ऋतु या मौसिम | २. शरद् ऋतु । फलाना - संज्ञा पुं० श्रमुक । कोई अनिश्चित । . फलालीन, फलालेन -संज्ञा पुं० एक प्रकार का ऊनी वस्त्र । • फलाहार - संज्ञा पुं० केवल फल खाना । फल- भोजन । फलाहारी -संज्ञा पुं० जो फल खाकर निर्वाह करता हो । फलित - वि० १. फला हुश्रा । २. संपन्न | पूर्ण | फली - संज्ञा स्त्री० छोटे पौधों में लगने- वाले लंबे और चिपटे फल जिनमें छोटे छोटे बीज होते हैं । फलीभूत - वि० फलदायक | जिसका फल या परिणाम निकले । फसल - संज्ञा स्त्री० १. ऋतु | मौसम | २. समय । काल । ३. सस्य । खेत की उपज । अन्न | फसली - वि० ऋतु का । संज्ञा पुं० १. अकबर का चलाया हुआ एक संवत् । इसका प्रचार उत्तर भारत में खेती-बारी श्रादि के काम में होता है । २. हैजा । फहरान-संज्ञा स्त्री० फहराने का भाव या क्रिया । फहराना- क्रि० स० कोई चीज़ इस प्रकार खुली छोड़ देना जिसमें वह हवा में हिले और उड़े | उड़ाना ।
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