फाँक क्रि० प्र० हवा में रह रहकर हिलना या उड़ना । फहरना । फाँक- संज्ञा स्त्री० १. किसी गोल या पिंडाकार वस्तु का काटा या चीरा हुआ टुकड़ा । २. खंड | टुक | फाँकना - क्रि० स० दाने या बुकनी के रूप की वस्तु को दूर से मुँह में डालना । फोड़ा। -संज्ञा पुं० दुपट्ट े या धोती का कमर में बँधा हुआ हिस्सा । फाँद - संज्ञा स्त्री० उछलने या फाँदने का भाव । उछाल । संज्ञा पुं० फंदा । पाश । फाँदना - क्रि० प्र० एक स्थान से दूसरे स्थान पर कूदना । उछलना । क्रि० स० कूदकर घिना | फाँस - संज्ञा स्त्री० १. पाश । बंधन । फंदा । २ वह फंदा जिसमें शिकारी लोग पशु-पक्षी फांसते हैं । संज्ञा खा० बाँस, सूखी लकड़ी आदि का कड़ा तंतु जो शरीर में चुभ जाता है । फाँसना- क्रि० में स० १. पाश बाँधना । जाल में फँसाना । धोखा देकर अपने अधिकार में करना । २. फाँसी -संज्ञा स्त्री० वह रस्सी का फंदा जिसमें गला फँसने से घुट जाता है और फँसनेवाला मर जाता है । फाका - संज्ञा पुं० उपवास । जो फाक़ामस्त, फाक मस्त - वि० खाने-पीने का कष्ट उठाकर भी कुछ चिंता न करता हो । फाखता - संज्ञा स्त्री० पंडुक । फाग - संज्ञा पुं० १. ३३ । फागुन में होने- ५१३ फारसी वाला उत्सव जिसमें एक दूसरे पर रंग या गुलाल डालते हैं । २. वह गीत जो फाग के उत्सव में गाया जाता है फागुन- संज्ञा पुं० माघ के बाद का महीना । फाल्गुन । फ़ाज़िल - वि० १. श्रावश्यकता से अधिक । २. विद्वान् । फाटक-संज्ञा पुं० बड़ा द्वार | बड़ा दरवाज़ा | फाड़न-संज्ञा स्त्री० कागज़, कपड़े आदि का टुकड़ा जो फाड़ने से निकले । फाड़ना- क्रि० स० 9. चीरना । विदीर्ण करना | २. टुकड़े करना । धज्जियाँ उड़ाना ३. संधि या जोड़ फैलाकर खोलना । ४. किसी गाढ़े द्रव पदार्थ को इस प्रकार करना कि पानी और सार पदार्थ अलग अलग हो जायँ । फातिहा - संज्ञा पुं० १. प्रार्थना । २. वह चढ़ावा जो मरे हुए लोगों के नाम पर दिया जाय । ( मुसल० ) . फानूस - संज्ञा पुं० १. एक प्रकार की बड़ी कंदील | २. एक दंड में लगे हुए शीशे के कमल या गिलास श्रादि जिनमें बत्तियाँ जलाई जाती हैं । . फायदा -संज्ञा पुं० लाभ । नफा । . फायदेमंद - वि० लाभदायक । फारखती - संज्ञा स्त्री० वह लेख जो इस बात का सबूत हो कि किसी के ज़िम्मे जो कुछ था, वह अदा हो गया । चुकती । बेबाकी । फारस - संज्ञा पुं० दे० "पारस" । फारसी - संज्ञा स्त्री० फारस देश की भाषा ।
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