फिरियाद फिरियाद [ -संज्ञा खी० दे० "फुरि याद" । फिल्ली- संज्ञा खी० पिंडली । (ग) फिस - वि० कुछ नहीं । ( हास्य ) फिसड्डी - वि० १. जिससे कुछ करते- धरतेन बने । २. जो काम में सबसे पीछे रहे । फिसलन - संज्ञा स्त्री० १. फिसलने की क्रिया या भाव । रपटन । २. चिकनी जगह जहाँ पैर फिसले । फिसलना - कि० प्र० चिकनाहट और गीलेपन के कारण पैर आदि का न जमना । रपटना ! । फीका - वि० १. स्वादहीन । २. जो चटकीला न हो । धूमला । ३. कांतिहीन । बे रौनक | फीता - संज्ञा पुं० पतली धज्जी, सूत आदि जो किसी वस्तु को लपेटने या बांधने के काम में आता है । फीरोज़ा - संज्ञा पुं० हरापन लिए नीले रंग का एक नग या बहुमूल्य परयर | फीरोजी - वि० हरापन लिए नीला । फील - संज्ञा पुं० हाथी । फीलपा -संज्ञा पुं० एक रोग जिसमें पैर या और कोई अंग फूलकर हाथी के पैर की तरह हो जाता है । फोलवान -संज्ञा पुं० हाथीवान । फीली - संज्ञा खो० पिंडली । फुकना - क्रि० प्र० १. फूकने का अकर्मक रूप । २. जलना । भस्म होना | सुंज्ञा पुं० दे० "फु कनी" । फुकनी - संज्ञा स्त्री० १. वह नली "जिसे मुँह से फूँककर श्राग सुल- गाते हैं । २. भाथी । ५१५ फुफू फुंकरना- क्रि० प्र० फूस्कार छोड़ना । फू फूँ शब्द करना । फुकवाना, फुंकाना - क्रि० फूँकन का काम दूसरे से कराना । मब्बा । स० फुंकार - संज्ञा पुं० दे० " फूस्कार" । फुंकार-संज्ञा फुदना - संज्ञा पुं० फूल के आकार की गांठ जो बंद, डोरी, कालर आदि के छोर पर शोभा के लिये बनाते हैं । फुलरा । फुदिया -संज्ञा स्त्री० दे० "फुंदना" । फुंदी - संज्ञा स्त्री० फंदा । गठि । फुंसी - संज्ञा स्त्री० छोटी फोड़िया । फुकना - क्रि० प्र० दे० "फुकना" । फुचड़ा - संज्ञा पुं० कपड़े आदि की बुनी हुई वस्तुओं में बाहर निकला हुआ सूत या रेशा । फुट - वि० १. अकेला । २ अलग । संज्ञा पुं० १२ इंच की एक माप । फुटकर, फुटकल - वि० १. धकेला । २. अलग | पृथक् । ३. कई प्रकार का। कई मेल को । ४. थोक का उलटा । . 1 फुटका -संज्ञा पुं० फफोला । फुदकना- क्रि० भ० १. उछल उछल- कर कूदना । २. उमंग में आना । फुदकी -संश स्त्री० एक प्रकार की छोटी चिड़िया । फुनगी - संज्ञा स्त्री० वृक्ष या पौधे की शाखाओं का प्रभाग । अंकुर । फुप्फुल-संज्ञा पुं० फेफड़ा । फुफकार - संज्ञा पुं० साँप के मुँह से निकली हुई हवा का शब्द । फुंकार । फुफकारना - क्रि० प्र० साँप का मुँह से फूँक निकालना । फूटकार करना । फुफू-संज्ञा जी० दे० "फूफी" ।
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