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पृष्ठ:बाल-शब्दसागर.pdf/५३१

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यसरी बखरी 1 - संज्ञा स्त्री० मिट्टी, ईंटों श्रादि का बना हुआ मकान । (गाँव) बखसीस + - संज्ञा स्त्री० दे० "बक- सीस" । बखान - संज्ञा पुं० १. वर्णन | कथन | २. प्रशंसा । स्तुति । बड़ाई । बखानना- क्रि० स० १. वर्णन करना । कहना । २. प्रशंसा करना । सरा. हना । बखार-संज्ञा पुं० दीवार आदि से घिरा हुआ गोल घेरा जिसमें गाँवों में न रखा जाता है । बखिया संज्ञा पुं० एक प्रकार की महीन और मज़बूत मिलाई । बखीर + - संज्ञा स्त्री० मीठे रस में उबाला हुआ चावल | बखेड़ा - संज्ञा पुं० १. कंकट | उलझन । २. झगड़ा | टंटा । बखेड़िया - वि० बखेड़ा करनेवाला । झगड़ालू । बखेरना- क्रि० स० चीज़ों को इधर- उधर या दूर दूर फैलाना । छितराना । ब खतर- संज्ञा पुं० दे० "बकतर" । • ब. एशना- क्रि० स० १ देना । प्रदान करना । २. माफ करना । बख्शिश - संज्ञा स्त्री० १. दान | क्षमा । बर्गा - संज्ञा पुं० बगुला । २. बगई | संज्ञा खो० १ एक प्रकार की - स्त्री० मक्खी जो कुत्तों पर बहुत बैठती है । कुकुरमाछी । २. एक प्रकार की घास । बगछुट, बगटुट - क्रि० बि० सरपट | बेतहाशा | बड़े वेग से । बगदना ! - क्रि० भ० लुढ़कना । बगमेल - संज्ञा पुं० दूसरे के घोड़े ५२३ बगारना के साथ बाग मिलाकर चलना । बराबर बराबर चलना । क्रि० वि० बाग मिलाए हुए । साध साथ । बगर + - संज्ञा पुं० १. महल । प्रासाद | २. बड़ा मकान । घर । ३. सहन । श्राँगन | 8. वह स्थान जहाँ गौएँ बाँधी जाती हैं। बगार । घाटी । संज्ञा स्त्री० दे० " बगल" । बगरना - क्रि० भ० फैलना | बगराना- क्रि० स० फैलाना । छित- राना । छिटकाना | क्रि० अ० बगरना । फैलना | बिखरना । बगरी / -संज्ञा स्रो० दे० " बखरी" । बगल - संज्ञा स्त्री० १. बाहु-मूल के नीचे की ओर का गड्ढा । कख । २. पार्श्व । ३ समीप का स्थान । पास की जगह | बगलबंदी - संज्ञा स्त्री० एक प्रकार की मिरजई या कुरती । बगला - संज्ञा पुं० सफ़ेद रंग का एक प्रसिद्ध पक्षी जिसकी टांगे, चोंच और गला लंबा होता है । बगलियाना- क्रि० प्र० बगल से होकर जाना । अलग हटकर चलना या निकलना । क्रि० २. ० स० १. श्रलग करना । बगल में लाना या करना । बगलौहाँ 1 - वि० बगल की ओर झुका हुश्रा | तिरछा | बगार - संज्ञा पुं० वह स्थान जहाँ गाएँ बांधी जाती हैं। घाटी । बगारना- क्रि० स० फैलाना । छिट काना | बिखेरना ।